मनोज जरांगे के अनशन से पहले महाराष्ट्र में बढ़ा सियासी पारा

0
36

– राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने दी आंदोलन की चेतावनी

नागपुर :- महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा 3० मई से दोबारा आमरण अनशन शुरू करने के एलान के बाद राज्य सरकार की हलचलें तेज हो गई हैं. लेकिन जरांगे के इस आंदोलन से ठीकपहले अब ओबीसी समाज भी पूरी तरह आक्रामक रुख में आ गया है. राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने राज्य सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है. महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. बबनराव तायवाडे ने स्पष्ट कर दिया है कि मराठा समाज की मांगें पूरी करते समय अगर ओबीसी आरक्षण को जरा सा भी धक्का लगा, तो पूरे राज्य में तीव्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा. इस दोहरे दबाव के कारण अब सरकार के सामने दोनों समाजों के बीच संतुलन बनाए रखने की एकबेहद बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

मनोज जरांगे पाटिल द्वारा भीषण गर्मी में एक बार फिर भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा के बाद राज्य का माहौल तनावपूर्ण हो गया है. जरांगे पाटिल इस बात पर अड़े हैं कि सरकार मराठा समाज की मांगों पर तुरंत ठोस निर्णय ले. दूसरी तरफ, ओबीसी संगठनों ने भी अपनी घेराबंदी मजबूत कर दी है.

नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. बबनराव तायवाडे ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें मराठा समाज के आंदोलन से कोई विरोध नहीं है, लेकिन ओबीसी के मौजूदा आरक्षण में किसी भी तरह की कटौती या हस्तक्षेप को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर सरकार किसी भी दबाव में आकर फैसला लेती है, तो पूरे महाराष्ट्र का ओबीसी समाज सडक़ों पर उतरकर इसका कड़ा जवाब देगा.

तायवाडे ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की भूमिका में है, लेकिन यह रुख हमेशा के लिए नहीं है. उनकी मांग है कि मराठा समाज को आरक्षण देते समय मूल ओबीसी कोटे को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए. उन्होंने आगाह किया कि सरकार ओबीसी समाज के अधिकारों पर आंच न आने दे. जरांगे के अनशन के साथ-साथ ओबीसी महासंघ के इस कड़े स्टैंड ने सरकार की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. तायवाडे ने ‘सगे-सोयरे’ (रक्त संबंधी) अध्यादेश को लेकर भी एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि मनोज जरांगे पाटिल भले ही इस कानून को तुरंत लागू करने की मांग पर अड़े हैं, लेकिन इस अध्यादेश की कानूनी प्रक्रिया पहले से ही जारी है. उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे की आड़ में ओबीसी आरक्षण में सेंध लगाने की कोशिश न की जाए. अगर सरकार ने किसी भी दबाव में आकर ओबीसी कोटे के साथ छेड़छाड़ की, तो इसके गंभीर परिणाम पूरे राज्य में देखने को मिलेंगे.

मनोज जरांगे पाटिल के अनशन की घोषणा के बाद से ही सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है. मुंबई में वरिष्ठ नेताओं और आला अधिकारियों की बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और स्थिति को संभालने की कोशिशें की जा रही हैं. हालांकि, जरांगे पाटिल अपने रुख पर पूरी तरह कायम हैं, जिससे सरकार की नींद उड़ी हुई है. अब दूसरी ओर से ओबीसी महासंघ द्वारा भी कड़ा रुख अख्तियार कर लेने से सरकार के सामने दुहरा संकट खड़ा हो गया है. आगामी दिनों में मराठा और ओबीसी, दोनों ही समाजों के आक्रामक तेवरों के कारण महाराष्ट्र का सियासी और सामाजिक माहौल और ज्यादा गरमाने के आसार हैं.