रेलवे स्टेशन पुनर्विकास : एक बार फिर समय सीमा चूकने का खतरा

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– यह अवधि 2०29 तक बढ़ सकती हैं

नागपुर :- नागपुर रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय परिवहन केंद्र में बदलने की महत्वाकांक्षी परियोजना अब आकार लेने लगी है, लेकिन बढ़ती देरी और रुके हुए विकास कार्य ने इस बात पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं कि क्या परियोजना अपने संशोधित समय सीमा लक्ष्य को पूरा कर पाएगी.

भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान के अंतर्गत शुरू की गई 487.77 करोड़ रुपये की इस पुनर्विकास परियोजना से मध्य भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक को आधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित करने और साथ ही इसकी ऐतिहासिक स्थापत्य पहचान को संरक्षित करने की उम्मीद थी. हालांकि, परियोजना के कुछ हिस्सों में स्पष्ट प्रगति के बावजूद, कई महत्वपूर्ण घटक अभी भी पूर्ण होने से बहुत दूर हैं.

सबसे बड़ा झटका स्टेशन के पश्चिमी हिस्से में लगा है, जहां विरासत संरचना से सटी एक पुरानी लाल इमारत को गिराने का काम महीनों से रुका हुआ है. रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कार्यालय, सरकारी रेलवे पुलिस स्टेशन, स्वास्थ्य केंद्र, क्लॉक रूम, भोजन सुविधाएं और अन्य इकाइयां अभी तक प्लेटफार्म 1 के पास नवनिर्मित भवन में स्थानांतरित नहीं हो पाई हैं. सूत्रों के अनुसार, नए परिसर में लॉक-अप सुविधाओं के अभाव के कारण आरपीएफ और जीआरपी दोनों इकाइयों के स्थानांतरण में देरी हुई है, जिससे विध्वंस कार्य रुक गया है और निर्माण के अगले चरण पर भी असर पड़ा है.

इस देरी ने रेलवे विभाग में इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि परियोजना की समयसीमा संशोधित लक्ष्य से काफी आगे बढ़ सकती है, और कुछ अधिकारियों ने निजी तौर पर स्वीकार किया है कि पूरा होने में समय लग सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2०22 में नागपुर स्टेशन पुनर्विकास परियोजना की आधारशिला रखी थी, जिसकी मूल समय सीमा 36 महीने निर्धारित की गई थी. वह समय सीमा दिसंबर 2०25 में समाप्त हुई, जिसके बाद परियोजना को एक वर्ष का विस्तार दिया गया. इस अवधि के दौरान, कई प्रमुख कार्य अभी भी लंबित हैं, जिससे एक और विस्तार की संभावना बढ़ती जा रही है.

स्टेशन के पूर्वी हिस्से में निर्माण कार्य में तेजी आई है, जबकि पश्चिमी हिस्सा अभी भी पिछड़ा हुआ है. पूर्वी भाग में स्थित एक प्रमुख इमारत का निर्माण कार्य पूरा होने के करीब है और अंतिम रूप देने का काम चल रहा है, जबकि मेट्रो कनेक्टिविटी से जुड़ी एक अन्य संरचना में भी तेजी से प्रगति हो रही है.

वहीं दूसरी ओर, पश्चिमी खंड में प्रस्तावित भूमिगत पार्किंग सुविधा पर काम लगभग एक साल पहले योजना बनाए जाने के बावजूद अभी तक पूरी तरह से शुरू नहीं हुआ है.

आगामी प्रमुख कार्यों में एक विशाल ऊंचा कॉनकोर्स, नए फुट ओवरब्रिज, मेट्रो का एकीकरण, समर्पित आगमन और प्रस्थान विंग, लिफ्ट, एस्केलेटर और ट्रैवलर शामिल हैं, जिन्हें बढ़ते यात्री यातायात को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

फिलहाल, पुनर्विकास की तस्वीर मिली-जुली है, एक तरफ प्रभावशाली बुनियादी ढांचा उभर रहा है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक बाधाएं इसकी गति को धीमा कर रही हैं.