चंद्रपुर :- चंद्रपुर महानगरपालिका में चल रही कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब एक बड़े कानूनी और राजनीतिक युद्ध में तब्दील हो चुकी है। गुटबाजी और अपनों को ही पटखनी देने के इस खेल में कांग्रेस के गटनेता (संसदीय दल के नेता) राजेश अडूर ने अपनी ही पार्टी के 16 पार्षदों को अयोग्य ठहराने के लिए नागपुर विभागीय आयुक्त के पास याचिका दायर कर दी है। इस कदम से चंद्रपुर की राजनीति में हड़कंप मच गया है।
राजेश अडूर ने यह कड़ी कार्रवाई ‘महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण सदस्य अयोग्यता अधिनियम, 1986’ के तहत की है, जिससे इन पार्षदों की सदस्यता पर सीधे तौर पर खतरा मंडराने लगा है।
कैसे शुरू हुआ ‘कुर्सी का यह दंगल’?
गटनेता का चयन: 15 जनवरी 2026 को हुए महानगरपालिका चुनाव के बाद कांग्रेस के टिकट पर जीते पार्षदों ने 6 फरवरी को एक आधिकारिक गुट बनाया था। इस बैठक में सर्वसम्मति से राजेश अडूर को गटनेता चुना गया और उन्हें व्हिप जारी करने व उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के अधिकार दिए गए।
तख्तापलट की कोशिश: विवाद तब भड़का जब 11 जून को 15 पार्षदों के हस्ताक्षर के साथ अडूर को एक नोटिस मिला। इसमें अडूर को हटाकर नया गटनेता चुनने के लिए 15 जून को एक बैठक बुलाई गई थी।
व्हिप का ‘काउंटर अटैक’: अडूर ने इस बैठक को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया और पार्षदों को इसमें न जाने का व्हिप जारी किया। इसके बाद उन्होंने खुद पलटवार करते हुए 14 जून को एक आधिकारिक बैठक बुलाई और सभी 26 कांग्रेस पार्षदों को हाजिर रहने का कड़ा निर्देश दिया।
व्हिप का उल्लंघन और बगावत
असली मोड़ तब आया जब 14 जून को राजेश अडूर द्वारा बुलाई गई बैठक में 16 पार्षद नहीं पहुंचे। इस बैठक में मौजूद रहे 11 पार्षदों ने एक प्रस्ताव पास किया कि गटनेता की लिखित अनुमति के बिना कोई भी बैठक नहीं बुलाई जा सकती, इसलिए 15 जून की बैठक गैरकानूनी है।
इसके बावजूद, बागी गुट के 16 पार्षदों ने 15 जून की बैठक में हिस्सा लिया। अडूर का आरोप है कि यह सीधे तौर पर पार्टी के आदेश (व्हिप) की अवहेलना और अनुशासनहीनता है।
अयोग्यता की तलवार: इन 16 पार्षदों पर गिरी गाज
राजेश अडूर ने विभागीय आयुक्त से मांग की है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और व्हिप के उल्लंघन के कारण इन सभी 16 पार्षदों को उनके मौजूदा कार्यकाल के साथ-साथ आगामी 6 वर्षों के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।
इन पार्षदों की सदस्यता खतरे में:
वनश्री मेश्राम, करुणा चालखुरे, सुनील खंडेलवाल, आकाश मानकर, महानंदा वाळके, शिला सिडाम, राहुल चौधरी, अजय बल्की, राहुल घोटेकर, सुरेंद्र आडबळे, सुनंदा धोबे, संगीता अमृतकर, सईदाबी शेख, रामनरेश यादव, संगीता भोयर और वैशाली महाडुळे।
अब विभागीय आयुक्त के फैसले पर टिकी नजरें
कांग्रेस के भीतर का यह तूफान अब केवल पार्टी का अंदरूनी मामला नहीं रहा, बल्कि यह चंद्रपुर मनपा की सत्ता के समीकरण को बदल सकता है। डावपेचों के इस राजकारण में अब गेंद नागपुर के विभागीय आयुक्त के पाले में है। पूरे राजनीतिक हलके की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन 16 पार्षदों की कुर्सी बचेगी या अडूर का यह सियासी दांव बगावत करने वालों पर भारी पड़ेगा!







