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नागपुर की गलियों से चौकों तक सियासी संग्राम

– विकास बनाम नाराजगी में फंसे उम्मीदवार

– महिला-युवा उम्मीदवारों की एंट्री से बदला चुनावी रंग, पुराने चेहरों को चुनौती

नागपुर :- नागपुर मनपा चुनाव को देखते हुए शहर का राजनीतिक माहौल अच्छा खासा गर्माया है. चौकों में लगे विभिन्न दलों के झंउे, दीवारों पर लिखे उम्ीदवरों के नाम, बैनर-पोस्टर्स प्रचार वाहन और घोषणाओं से नागपुर सही मायने में चुनावमय हुआ है. गलियों से लेकर मुख्य सडक़ तक इस बार कौन जितेगा? इस पर जोरदार चर्चा हो रही है. हर प्रभाग स्वतंत्र रण बना है.

प्रमुख राजनीतिक दलों सहित नीर्दलिय उम्मीदवार भी जोश से मैदान में उतरे है. नुक्कड़ बैठके, पदयात्रा, घर-घर जाकर मतदाातओं से संवाद, तो वही दुसरी ओर सोशल मीडिया से प्रचार की मार ऐसा दोहरा दांव इन दिनों उपराजधानी में शुरू है. सुबह गल्ी में बैठक, दोपहर मतदाताओं से भेंट और शाम को जाहीर सभा, ऐसी उम्मीदवारों की दिनचर्या बनी है.

इस चुनाव में विकास का मुद्दा केंद्र में है, तो भी नाराजगी का स्वर भी उभर रहा है. जलापूर्ति की अनियमितता, गड्ढे से भरी सडक़े, कचरे के ढेर, डे्रनेज के काम, यातायात और पार्किंग के प्रश्न यह मुद्दे मतदाताओं द्वारा उम्मीदवारों के सामने रखे जा रहे है. पांच वर्ष में केवल चुनाव में ही दर्शन देनेवाले न हो, ऐसी स्पष्ट भूमिका नागरिक लेते हुए देखा जा रहा है.

उत्तर, दक्षिण, मध्य, पूर्व, पश्चिम नागपुर में मुद्दों की तीव्रता अलग-अलग है. झोपडपट्टीबहुल प्रभागों में मूलभूत सुविधाओ ंका अभाव यह असली मुद्दा साबित हो रहा है. वही सुस्थिति वाली कॉलोनियों में जलसंकट, याताात बाधा और स्मार्ट सिटी प्रकल्प का अपेक्षित लाभ न मिलने की वेदना व्यक्त हो रही है. कुछ प्रभागों में अंतर्गत राजनीति से यह लड़ाई अधिक रंगतदार बनी है.

इस बार महिला और युवा उम्मीदवारों की संख्या बढऩे से प्रचार में अलग रंग भरा है. महिला उम्मीदवार स्वच्छता, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और बालकल्याण के मुद्दे आक्रमकता से रख रहे है. युवा उम्मीदवार ‘नया नेतृत्व, पारदर्शी काम’ ऐसा नारा देते हुए पारंपारिक राजनीति पर आरोप कर रहे है. इससे कुछ प्र्रभागों में पुराने चेहरों के सामने नया आह्वान खड़ा हुआ है.

सोशल मीडिया ने इस बार के चुनाव में प्रचार की दिशा बदली है. वॉट्स एप गु्रप्स, फेसबुक लाइव, इंस्टाग्राम रिल्स से आरोप-प्रत्यारोप,विकास के आश्वासन और विरोधियों पर आरेाप जोर से शुरू किए है. परंतु, झुठे प्रचार पर रेाक लगाने का आहवान प्रशासन के सामने खड़ा हुआ है.

चुनाव प्रचार के ‘हॉट’ मुद्दे

जलापूर्ति और जलसंकट, गड्ढेमय सडक़ें, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता, यातायात जाम और पार्किंग, स्मार्ट सिटी प्रकल्प का प्रत्यक्ष लाभ यह चुनाव प्रचार के हॉट मुद्दे बनें है.

क्या कहते हैं शहरवासी ?

काम दिखा तो ही वोट, केवल आश्वासन नहीं, अमल हो, पांच वर्ष का हिसाब देना होगा, प्रभाग में कायम उपस्थित होनेवाला पार्षद हो, ऐसा शहरवासी चाहते है.


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