पोतदार का प्यार, आशीष की आशिकी और मनोहर की पैसों से मोहब्बत ना जाने लेंगी कितनों की जान ?

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– आशीष और पोतदार का कथित ‘करीबी’ मनोहर फरेबी क्या उनके भविष्य की नैया डुबो देगा?

नागपुर :- सूत्रों के हवाले से एक और नया चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर मनोहर नाम के शख्स ने ठेकेदारों को काम दिलाने के नाम पर लाखों-करोड़ों की ठगी की है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इस बार मामला इंसानियत को झकझोर देने वाला है। मनोहर के एक और लालची और बेरहम किस्से की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि काटोल / नरखेड के एक ठेकेदार से टेंडर दिलाने के नाम पर मनोहर ने लगभग 3.5 लाख रुपये लिए थे। एक-दो साल बीत जाने के बाद भी मनोहर ने उस ठेकेदार को काम नहीं दिलाया।

इसी बीच ठेकेदार की मासूम बच्ची की तबीयत बिगड़ गई। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीमार बच्ची कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही और इलाज का खर्च बढ़ता रहा। बच्ची के इलाज के लिए पैसों की जरूरत बहुत ज्यादा बढ़ने लगी। ठेकेदार पिता ने अपनी खून-पसीने की कमाई, जो उसने मनोहर को टेंडर दिलाने के लिए दी थी, अब अपनी बेटी की जान बचाने के लिए वापस मांगना शुरू किया। न जाने कितने फोन मनोहर को किए, लेकिन हर बार मनोहर अपने राजनीतिक और धूर्त रवैये के कारण टालमटोल करता रहा। ठेकेदार पिता परेशान होकर बच्ची के इलाज की फाइल लेकर एक दिन बिना बताए सुबह-सुबह मनोहर के घर पहुंचा। उसने फाइल दिखाकर अपने पैसे वापस मांगे और बीमार बच्ची के इलाज के लिए रोया और गिड़गिड़ाया, लेकिन मनोहर का मन नहीं पसीजा। ठेकेदार पिता रोता रहा और गिड़गिड़ाता रहा। ठेकेदार के रोने और गिड़गिड़ाने की आवाज आसपास के पड़ोसी लोगों ने भी सुनी। तब मनोहर को लगा कि कहीं उसका भांडा न फूट जाए, इसलिए उसने 3.5 लाख रुपये में से अंततः केवल 50 हजार रुपये ही लौटाए, जबकि आज भी ठेकेदार के 3 लाख रुपये बाकी हैं। बच्ची के इलाज के लिए उस पिता को कर्ज लेना पड़ा। यह सवाल अब गंभीर होता जा रहा है कि क्या मनोहर को उस मासूम बच्ची की पीड़ा भी नहीं दिखाई दी?

सूत्रों का दावा है कि मनोहर ने काम दिलाने के नाम पर कई छोटे-बड़े ठेकेदारों से करोड़ों रुपये जुटाए हैं। जिन लोगों ने उसे वर्क ऑर्डर के लिए पैसे दिए, उन्हें अब तक न तो काम मिला और न ही पैसा वापस। उल्टा, उन्हें धमकाने की खबरें भी सामने आ रही हैं। चर्चा है कि मनोहर खुद को एक प्रभावशाली मंत्री का करीबी बताकर ठेकेदारों को डराता है और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने तथा उनकी ठेकेदारी बंद कराने की धमकी देता है। इससे ठेकेदारों में भय का माहौल बन गया है। इस पूरे मामले को लेकर माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इस लेख के माध्यम से सभी ठेकेदारों से अपील की जा रही है कि वे डरें नहीं, सामने आएं और अपनी आपबीती सार्वजनिक करें, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। अब वक्त है कि सच सामने आए, ताकि भविष्य में किसी और ठेकेदार या उसके परिवार को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।

– मनोहर पर कानून का शिकंजा तय; पीड़ित ठेकेदारों को मिलेगा पूरा संरक्षण!

इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए एक वरिष्ठ नेता ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर मनोहर पर लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो उसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो या किसी बड़े नेता-मंत्री का करीबी हो, कानून अपना काम करेगा और सख्त कार्रवाई तय है। नेता ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी में इंसानियत सर्वोपरि है, न कि किसी लुटेरे या गलत काम करने वाले का संरक्षण।

उन्होंने ठेकेदारों से अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि जो भी सामने आने से डर रहे हैं, उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पीड़ितों को सही समय पर मुख्यमंत्री के सामने पेश किया जाएगा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। नेता ने अंत में कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे और दोषियों को उनके अंजाम तक जरूर पहुंचाया जाएगा।

– ठेकेदारों की आस; आमदार से हस्तक्षेप की मांग, मनोहर पर हो तत्काल कार्रवाई

एक तरफ जहां साफ-सुथरी छवि के लिए पहचाने जाने वाले आमदार का नाम जनता में सम्मान से लिया जाता है, वहीं दूसरी ओर मनोहर जैसे लोगों की हरकतें उस छवि को धूमिल कर रही हैं। इस पूरे मामले को लेकर ठेकेदारों में भारी भय और आक्रोश का माहौल है।

पीड़ित ठेकेदारों की मांग है कि आमदार खुद इस मामले में हस्तक्षेप करें और मनोहर के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि जिन लोगों के लाखों-करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं, उन्हें न्याय मिले और उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाई जाए।

साथ ही ठेकेदारों ने यह भी मांग उठाई है कि भविष्य में मनोहर द्वारा उनके कामों में किसी भी प्रकार का अड़ंगा, दबाव या हिंसा न हो, इसके लिए उसे उसके पद से तुरंत हटाया जाए। अब सभी की नजर आमदार के फैसले पर टिकी है—क्या वे अपनी साफ छवि के अनुरूप कड़ा कदम उठाएंगे और ठेकेदारों को न्याय दिलाएंगे, या फिर यह मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

– करोड़ों की उगाही का काला खेल: मनोहर अकेला या पूरा गठजोड़?

• क्या मनोहर इस पूरे मामले में अकेला है या अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं?

• क्या किसी प्रकार का राजनीतिक या प्रभावशाली संरक्षण इसमें भूमिका निभा रहा है?

• क्या आशीष की चुप्पी किसी गहरी जानकारी या दूरी, दोनों में से किसी एक की ओर इशारा करती है?

• आखिर कौन हैं वे चेहरे, जो इस करोड़ों की उगाही में पर्दे के पीछे हिस्सेदार बने बैठे हैं? यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।