चंद्रपूर :- सरकारी कुर्सी जनसेवा के लिए होती है या अपनी तिजोरियां भरने के लिए? इसका एक ‘ज्वलंत’ उदाहरण चंद्रपुर जिलाधिकारी कार्यालय (कलेक्ट्रेट) में तैनात वह ‘सुपरफास्ट’ स्टेनो है, जिसने भ्रष्टाचार के मामले में मानो PhD कर ली हो। पिछले कई वर्षों से एक ही जगह पर कुंडली मारकर बैठे इस महाशय ने महज साढ़े तीन साल के कार्यकाल में 10 करोड़ रुपये की ‘टेबल के नीचे’ वाली कमाई कर प्रशासनिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं?
इस स्टेनो का रुतबा किसी बड़े आईएएस अधिकारी से कम नहीं है। कार्यालय में आने वाली हर ‘वजनी’ फाइल को हाथ लगाने के लिए इसने अपना एक अघोषित ‘रेट कार्ड’ तैयार कर रखा है।
निजी ‘कांटाघर’: चर्चा है कि एक बड़े अधिकारी के चैंबर में ही इसने अपना स्वतंत्र ‘जुगाड़ केंद्र’ खोल रखा था।
अपनों को भी नहीं बख्शा: चौंकाने वाली बात यह है कि इसने न केवल बाहरी लोगों से, बल्कि अपने ही विभाग के सहकाही कर्मचारियों से भी काम के बदले ‘वसूली दंड’ वसूला है।
चंद्रपुर में कार्यरत इस स्टेनो के चर्चे अब अमरावती जिले तक पहुंच चुके हैं। भ्रष्टाचार की काली कमाई से इसने अमरावती में चल-अचल संपत्ति का पहाड़ खड़ा कर दिया है।
“सरकारी क्वार्टर की दूसरी मंजिल पर रहने वाले इस स्टेनो की जीवनशैली किसी राजा-महाराजा जैसी है। भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा यह साम्राज्य अब जांच एजेंसियों के रडार पर है।”
एक्सप्रेस वे से भी तेज काम: कोल डेपो केस, प्लॉट क्लीयरेंस और परमिट लाइसेंस जैसे कामों में यह ‘चिक्की बाबा’ एक्सप्रेस-वे की रफ्तार से काम निपटाता है (बशर्ते वजन सही हो)।
बड़ा सवाल: जब एक मामूली स्टेनो ने इतने कम समय में 10 करोड़ रुपये बटोर लिए, तो उसके पीछे हाथ रखने वाले ‘बड़े साहब’ का हिस्सा कितना होगा? यह सवाल अब जनता पूछ रही है।
ACB की नजर और ‘वजनी’ फाइल तैयार
‘चिक्की बाबा’ के इस इनपुट और आउटपुट सोर्स पर अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की पैनी नजर है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस स्टेनो के काले कारनामों की विस्तृत सूची और उसकी बेनामी संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा तैयार हो चुका है। जल्द ही यह ‘वजनी फाइल’ आधिकारिक तौर पर एसीबी को सौंपी जाएगी।
अब देखना यह है कि इस ‘हीरो नंबर 01’ का पर्दाफाश कब होता है और इसके साथ कौन सी ‘बड़ी मछली’ जाल में फंसती है। भ्रष्टाचार की चादर ओढ़े इस चेहरे को ‘इन साईडर न्यूज जल्द ही बेनकाब करेगा।



