– राष्ट्रपति सचिवालय ने प्रस्ताव को जल शक्ति मंत्रालय भेजा
– ‘एक संस्था–एक कुआं/तालाब’ सहित पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन के सुझावों पर उपयुक्त कार्रवाई के निर्देश
नागपुर :- जल संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जनभागीदारी आधारित ‘एक संस्था–एक कुआं/तालाब’ राष्ट्रीय पहल को लेकर वरिष्ठ पत्रकार, जल योद्धा, स्टीमूलेशन थेरेपिस्ट एवं जल संरक्षण कार्यकर्ता डॉ. प्रवीण डबली द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजे गए प्रस्तावों का राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लिया है। राष्ट्रपति सचिवालय ने डॉ. डबली की याचिका को आवश्यक कार्रवाई के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग को अग्रेषित किया है।
राष्ट्रपति सचिवालय के 18 अगस्त 2026 के पत्र में स्पष्ट रूप से संबंधित विभाग से डॉ. डबली की याचिका पर उचित ध्यान देने का अनुरोध किया गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि याचिका पर की गई कार्रवाई की जानकारी सीधे याचिकाकर्ता को दी जाए। यह पत्र राष्ट्रपति सचिवालय के अवर सचिव कुलचंद्र कुमार द्वारा जारी किया गया है।
डॉ. डबली ने 4 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति को भेजे अपने विस्तृत पत्र में वर्षा जल संरक्षण, पारंपरिक एवं ऐतिहासिक कुओं, तालाबों और बावड़ियों के पुनर्जीवन के साथ जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए कई सुझाव प्रस्तुत किए थे। इनमें ‘एक संस्था–एक कुआं/तालाब’ राष्ट्रीय पहल को प्रमुखता से लागू करने का सुझाव दिया गया था।
प्रस्ताव के अनुसार देश की प्रत्येक सामाजिक संस्था, विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, धार्मिक संस्था, स्वयंसेवी संगठन और कॉर्पोरेट समूह अपने क्षेत्र के कम से कम एक पारंपरिक जल स्रोत के संरक्षण, पुनर्जीवन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्वीकार करे। डॉ. डबली का मानना है कि इससे जल संरक्षण को सरकारी योजनाओं से आगे बढ़ाकर व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है।
डॉ. डबली ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में देशभर के पारंपरिक जल स्रोतों का राष्ट्रीय स्तर पर सर्वेक्षण एवं डिजिटल दस्तावेजीकरण कराने, ऐतिहासिक कुओं-बावड़ियों एवं तालाबों को विरासत संरक्षण से जोड़ने, प्रत्येक जिले में ‘जलदूत’ एवं ‘जलप्रेमी’ स्वयंसेवी नेटवर्क विकसित करने तथा विद्यालयों और महाविद्यालयों में व्यवहारिक जल संरक्षण शिक्षा को बढ़ावा देने के सुझाव भी दिए थे।
पत्र में नागपुर के लगभग 250 वर्ष पुराने भोसलेकालीन मोतीबाग ऐतिहासिक कुएं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के प्रयासों, नागपुर के सार्वजनिक एवं ऐतिहासिक कुओं को बचाने के लिए चलाए गए जनजागरण अभियान तथा पांढराबोडी झील के पुनर्जीवन के लिए जारी नागरिक अभियान का भी उल्लेख किया गया था।
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा याचिका को जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग को अग्रेषित किए जाने को डॉ. डबली ने महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा सुझावों को संबंधित केंद्रीय विभाग तक पहुंचाया जाना इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम है।
उन्होंने कहा कि भारत में जल संकट से निपटने के लिए नए जल स्रोत विकसित करने के साथ-साथ पारंपरिक जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करना आवश्यक है। यदि प्रत्येक संस्था एक जल स्रोत को गोद लेकर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाए तो देश में लाखों कुएं, तालाब और अन्य पारंपरिक जल संरचनाएं पुनर्जीवित की जा सकती हैं।
डॉ. डबली ने उम्मीद जताई कि जल शक्ति मंत्रालय का संबंधित विभाग राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करेगा और जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप देने की दिशा में आगे पहल करेगा।





