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गडकरी को धमकी देने वाले पुजारी व पाशा को सुनाई 5 साल की सजा

नागपुर :- केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी को फोन पर 100 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने और बम विस्फोट की धमकी देने के मामले में न्यायालय ने आरोपी जयेश उर्फ जयेशकांत उर्फ शाहीर उर्फ शाकीर शशिकांत पुजारी (35) तथा अफसर पाशा उर्फ बसीरुद्दीन मोहम्मद (43) को दोषी करार देते हुए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनवाई है। यह निर्णय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिलकुमार शर्मा ने सुनाया। दोषी पुजारी और पाशा दोनों फिलहाल कर्नाटक के बेलगाव के जेल में हैं। वहीं इस प्रकरण का तीसरा आरोपी मोहम्मद शकीर मोहम्मद हनीफ अभी फरार है।जांच के अनुसार, 14 जनवरी और 21 मार्च 2023 को आरोपी जयेश पुजारी ने नागपुर स्थित गडकरी के जनसंपर्क कार्यालय में फोन कर 100 करोड़ रुपये की मांग की थी। रकम नहीं देने पर बम विस्फोट कर जान से मारने की धमकी दी थी। जांच में सामने आया कि ये फोन कर्नाटक की जेल से किए गए थे। इसके बाद नागपुर पुलिस ने 28 मार्च को बेंगलुरु जेल से प्रोडक्शन वारंट पर जयेश पुजारी को हिरासत में लेकर नागपुर लाया था। पूछताछ में उसके संबंध लश्कर ए तोएबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन तथा पीएफआई जैसे दहशतवादी संगठनों से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी। उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां प्रतिबंध अधिनियम के तहत दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए थे।

न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह सिद्ध हुआ कि आरोपी आरएसएस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की सूची बनाकर उन्हें धमकाने की साजिश रच रहे थे। इसके बाद न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 385, 387 और 506 तथा गैर-कानूनी गतिविधियां प्रतिबंध अधिनियम की धारा 10, 13(1) और 18 के तहत प्रत्येक आरोपी को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 30-30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर प्रत्येक धारा के तहत अतिरिक्त एक वर्ष के कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 507 के अंतर्गत प्रत्येक आरोपी को दो वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। जुर्माना अदा नहीं करने पर 10 महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा भी सुनाई गई। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील वेदिका पाटील और लिलाधर शेंद्र ने पैरवी की, जबकि आरोपीयों की ओर से एड. आर.पी. ढाले, एड. हेमंत झा और एड. उन्नति बोबडे ने पक्ष रखा। महिला पुलिस हवालदार सुषमा बेले ने पैरवी अधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस मामले में सरकारी पक्ष ने कुल 64 गवाह प्रस्तुत किए। न्यायालय ने त्वरित आधार पर लगातार सुनवाई करते हुए केवल 55 दिन में मुकदमे का फैसला सुनाया।


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