– बोले- नफरत रातोंरात पैदा नहीं होती, बीजेपी के नेतृत्व ने इसे नॉर्मल बनाया
त्रिपुरा :- देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या को लेकर सियासी प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “भयावह घृणा अपराध” बताते हुए भाजपा पर नफरत को सामान्य बनाने का आरोप लगाया और चकमा परिवार तथा उत्तर-पूर्व के लोगों के प्रति संवेदना जताई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी घटना को नफरती मानसिकता का परिणाम बताया और ऐसे तत्वों के बहिष्कार की बात कही।
त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की देहरादून में हत्या मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना पर चिंता जाहिर की। वहीं, सोशल मीडया हैंडल पर पोस्ट लिखते हुए उन्होंने कई बातें कही हैं।राहुल गांधी ने लिखा,”देहरादून में अंजेल चकमा और उनके भाई माइकल के साथ जो हुआ, वह एक भयावह घृणा अपराध है। नफरत रातोंरात पैदा नहीं होती। वर्षों से इसे रोजाना, खासकर हमारे युवाओं को, जहरीली सामग्री और गैर-जिम्मेदार बयानों के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है। कमेटी का कार्यकाल कितना होता है? संसद में कुल 50 संसदीय कमेटी होती हैं। इनमें 3 फाइनेंशियल कमेटीज, 24 डिपार्टमेंटल कमेटीज, 10 स्टैडिंग कमेटीज और 3 एडहॉक कमेटीज का कार्यकाल 1 साल का होता है। 4 एडहॉक कमेटीज और 1 स्टैडिंग कमेटी का कार्यकाल 5 साल का होता है। वहीं, 5 अन्य स्टैडिंग कमेटीज का कार्यकाल फिक्स नहीं होता। पार्लियामेंट्री कमेटी का क्या काम होता है? हर विभाग की कमेटी अलग होती है। उससे जुड़े मामलों में गड़बड़ी की जांच करना, नए सुझाव देना, नए नियम-कानून का ड्रॉफ्ट तैयार करना इन कमेटी का मुख्य काम है।
हर विभाग की कमेटी अलग होती है
पार्लियामेंट्री कमेटी को ये अधिकार कहां से मिले? पॉर्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी में शामिल सांसदों (कमेटी सदस्य) को संविधान के तहत दो अधिकार मिलते हैं। पहला आर्टिकल 105 – यह सांसदों को किसी कामकाज में दखल देने का विशेष अधिकार देता है। जिसके तहत वे कमेटी में अपनी राय और सुझाव देते हैं। दूसरा आर्टिकल 118- यह संसद के कामकाज में नियम-कानून बनाने का अधिकार देता है।




