Tuesday, March 31, 2026
spot_imgspot_img
spot_img

रसोई गैस बनी मुसीबत : आम जनता लाइन में, दलालों की चांदी

– ऑल इज वेल’ के दावों की पोल : नागपुर में गैस एजेंसियों की मनमानी चरम पर

– 25 दिन का नियम बेअसर

नागपुर :- अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने देश में आम नागरिकों की लूट का माहौल तैयार कर दिया है. नागपुर शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी खुलेआम हो रही है. एक ओर प्रशासन ‘ऑल इज वेल’ का दावा कर रहा है वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ता घंटों लाइन में लगकर भी गैस पाने के लिए परेशान है और एजेंसियों की मनमानी झेल रहा है.

कपिलनगर और रानी दुर्गावती चौक जैसे क्षेत्रों में सुबह से गैस एजेंसी के ऑफिस और गोदामों पर लोगों की भीड़ लग रही है. पूरा दिन बीतने के बाद भी अधिकांश लोग खाली सिलेंडर लेकर खाली हाथ ही घर लौट रहे हैं. हां, ये बात और है कि यदि किसी को शार्टकट में सिलेंडर चाहिए होगा तो उसे 2,500 से 4,000 रुपये तक अपनी जेब हल्की करनी होगी. यानी 960 से 1,000 रुपये तक के गैस सिलेंडर के लिए 3 से 4 गुना वसूली. चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ एजेंसी कर्मी खुलेआम यह दावा कर रहे हैं कि अतिरिक्त पैसे देने पर बिना रजिस्ट्रेशन ही तुरंत सिलेंडर उपलब्ध करा दिया जाएगा.

सरकार, राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा गैस उपलब्धता को लेकर ‘ऑल इज वेल’ के दावे किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. एजेंसियों की मनमानी और प्रशासन की निष्क्रयता इन दावों को पूरी तरह झूठा साबित कर रही है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. न तो जांच की जा रही है और न ही दोषियों पर कार्रवाई हो रही है. इससे एजेंसियों के हौसले और बढ़ गए हैं. इस पूरी अव्यवस्था का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी लोगों को या तो लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है.

कोई दोराय नहीं कि इस कालाबाजारी पर यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो हालात और बिगड़ सकते हैं. सिलेंडर की लाइन में लगने वाला नागरिक गरीबी रेखा से नीचे या निम्न मध्यमवर्गीय है. इनमें से कई ऐसे हैं जो हर दिन कमाते और हर दिन खाते हैं. यदि उनका पूरा दिन एक सिलेंडर लाने में गुजर जायेगा तो घर पहुंचने पर भी उसे भूखा ही रहना पड़ेगा क्योंकि कमाई का पूरा दिन लाइन में लगकर खर्च हो रहा है.

कुछ गैस एजेंसियों की मनमानी इस हद तक पार हो चुकी है कि केन्द्र सरकार द्वारा सिलेंडर डिलीवरी के लिए 25 और 45 दिनों की अनिवार्यता को भी ठेंगा दिखाने से नहीं चूक रहीं.

उल्लेखनीय है कि सरकार ने पश्चिम एशिया से गैस की बाधित आपूर्ति को देखते हुए आम नागरिकों को हर दूसरे सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी के बीच शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिनों का नियम बनाया है, लेकिन गैस एजेंसी अपनी मर्जी से इसे 25 दिन से 50 दिन करने पर तुली है.

नागपुर में 50 दिन बाद भी नहीं मिल रहा गैस सिलेंडर

कुछ गैस उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने 4 और 6 मार्च को बुकिंग की थी. इस हिसाब से उन्हें 30 मार्च को सिलेंडर मिल जाना था लेकिन एजेंसी वाले सुबह से शाम तक ऑफिस और गोडाउन के बीच घुमाकर कह रहे हैं कि इस डेट की बुकिंग से सिलेंडर नहीं मिलेगा.

हैरानी की बात है कि गैस एजेंसी वाले अब नये सिरे से बुकिंग प्रक्रिया करने को कह रहे हैं. यानी यहां से उपभोक्ता को और 25 दिनों के बाद सिलेंडर मिलेगा, मतलब कुल 50 दिन बाद, वह भी तब जब कोई सिलेंडर ब्लैक में बिकने से बच गया हो.


Click above on our news logo to access the Daily E_Newspaper.
For articles or advertisements, contact us at: dineshdamahe86@gmail.com.
WP Twitter Auto Publish Powered By : XYZScripts.com