नागपुर :- ज्योतिषीय गणना के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष बाद आने वाला अधिक मास इस बार प्रथम ज्येष्ठ मास के रूप में प्रारंभ हो चुका है. हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. इस बार यह पावन पुरुषोत्तम मास 15 जून तक रहेगा. इसके चलते शहर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिल रहा है. अधिक मास के दौरान नागपुर के विभिन्न क्षेत्रों के मंदिरों में सुबह से लेकर रात तक धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चल रही है. भजन कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन, पार्थिव शिवलिंग पूजन, हवन-पूजन, सत्संग और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन बड़ी संख्या में किया जा रहा है. श्रद्धालु रोजाना मंदिरों में पहुंचकर भगवान का स्मरण कर रहे हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं. टेकड़ी गणेश मंदिर, वर्धा रोड स्थित साईं मंदिर, वाठोडा स्थित स्वामीनारायण मंदिर, गणेश पेठ स्थित आग्याराम देवी मंदिर, मस्कासाथ, इतवारी, गोलीबार चौक, जागनाथ बुधवारी रोड, जरीपटका, वर्धमान नगर, वाठोड़ा, लोहापुल मार्ग और कॉटन मार्केट रोड सहित अनेक इलाकों में मंदिरों में दर्शनार्थ लोगों की भीड़ बढ़ी हैं.
धर्माचार्यों का कहना है कि अधिक मास आत्मचिंतन, साधना और प्रभु भक्ति के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है. इसलिए बड़ी संख्या में लोग व्रत, पूजा-पाठ और सत्संग में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभप्राप्त कर रहे हैं. वहीं, अधिक मास के चलते 15 जून तक मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा. इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, यज्ञोपवीत संस्कार और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास को केवल पूजा-अर्चना, तप, दान और साधना के लिए समर्पित माना जाता है. पूरे शहर में धार्मिक वातावरण के बीच मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है और भक्ति संगीत तथा प्रवचनों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है.
सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग
धार्मिक आयोजनों में विशेष रूप से भगवान गणेश, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जा रही है. कई मंदिरों में विष्णु सहस्रनाम पाठ, श्रीमद्भागवत कथा और श्रीमद्भगवद्गीता पर प्रवचन भी प्रारंभ हो गए हैं. विद्वान कथावाचक और संत अधिक मास के महत्व, दान-पुण्य और प्रभु भक्ति के बारे में श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दे रहे हैं. मंदिरों में धार्मिक मंडलों द्वारा विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. कई स्थानों पर सामूहिक हवन और देवी-देवताओं की कथाओं पर प्रवचन होरहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अधिक मास में इस बार 15 जून तक लगभग 10 बार विभिन्न शुभतिथियों पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में स्नान, दान, जप, तप, भजन-कीर्तन और प्रभु स्मरण करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है. विशेष रूप से तीर्थ स्नान, अन्नदान, गौसेवा और धार्मिक ग्रंथों के श्रवण को अत्यंत फलदायी माना गया है.