spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

नागपुर के 86 गांवों में बंद पड़े आरओ प्लांट, शुद्ध पानी को तरसे ग्रामीण

– भीषण गर्मी में बढ़ा जलसंकट: 14 गांवों में टैंकरों से पहुंचाया जा रहा पानी

– 10 लाख के आरओ प्लांट निकले घटिया! क्वालिटी पर सवाल, फिर होगा ऑडिट

नागपुर :- मई का महीना आधा गुजरने को है. भीषण गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है और इसके साथ ही जिले के ग्रामीण भागों में जलसंकट भी लगातार गहराता जा रहा है. जिप प्रशासन द्वारा हालांकि जलापूर्ति के लिए युद्धस्तर पर उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन पिछले 5 वर्षों में 86 गांवों के आरओ (जलशुद्धिकरण संयंत्र) खराब हो चुके हैं. इससे शुद्ध पेयजल के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं. ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नए आरओ संयंत्रों के कार्य बड़े पैमाने पर शुरू किए गए हैं. 15वें वित्त आयोग, 9 पीएच रखरखाव एवं मरम्मत हेड तथा ओटीएसपी योजना के तहत ये काम चल रहे हैं लेकिन पहले लगाए गए आरओ खराब होने से संबंधित गांवों में नागरिक परेशान हो रहे हैं.

आरओ संयंत्र लगाने के बाद ठेकेदार को काम की राशि मिल जाती थी. रखरखाव और मरम्मत की कोई समय सीमा तय नहीं होने के कारण इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता था लेकिन नई निविदा नीति में कम से कम 5 वर्ष तक रखरखाव और मरम्मत अनिवार्य कर दी गई है. तब तक ठेकेदार की जमा राशि वापस नहीं की जाएगी. खराब पड़े आरओ संयंत्रों की मरम्मत का कार्य तत्काल शुरू किया जाएगा.

अशोक धोंगे, कार्यकारी अभियंता, जिला परिषद ग्रामीण जलापूर्ति विभाग

क्वालिटी से किया गया समझौता जिप प्रशासन को शिकायतें मिली थी कि लगभग 10 लाख रुपये मूल्य के आरओ संयंत्र बेहद कम लागत में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए हैं जिसके चलते क्वालिटी से समझौता किया गया और वे खराब हो रहे हैं. इन शिकायतों के बाद जांच समिति गठित की गई थी. अब एक बार फिर बंद पड़े आरओ संयंत्रों का नया ऑडिट करने का निर्णय लिया गया है. पहले चरण में 86 स्थानों पर आरओ बंद पाए गए हैं. प्रशासन का कहना है कि यह संख्या और बढ़ सकती है. कुछ स्थानों पर आरओ बहुत कम समय में ही खराब हो गए, जिसके कारण ग्रामीणों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है. इन आरओ संयंत्रों की मरम्मत के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा. फिलहाल बंद पड़े आरओ संयंत्रों का आंकड़ा उपविभागीय स्तर से मंगवाया गया है.

गर्मी के मौसम को देखते हुए पानी की कमी से निपटने के लिए प्रशासन ने उपाययोजनाओं में तेजी लाई है. पानी के टैंकरों की फेरियां भी बढ़ा दी गई है. हिंगना और नागपुर ग्रामीण सहित 14 गांवों में 13 टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है. वहीं कुओं के अधिग्रहण के जरिए 110 गांवों की प्यास बुझाने का प्रयास किया जा रहा है. हिंगना तहसील के नंदेरा, पेंढरी, काजली, धानोली, कवडस, नवेगांव, कान्होली, आधारनगरी, इसासनी, शिरुल और सावंगी आसोला गांवों में 8 टैंकरों की सहायता से पानी पहुंचाया जा रहा है.

नई निविदा नीति सख्त: मरम्मत की जिम्मेदारी ठेकेदार की

वहीं नागपुर ग्रामीण तहसील के गोटाल पांजरी गांव में 4 टैंकर तथा रामटेक तहसील के वडांबा गांव में 1 टैंकर शुरू किया गया है. इन गांवों में निजी कुएं और बोरवेल पूरी तरह सूख चुके है. ग्रामीणों को ड्रमों में पानी जमा कर टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है. प्रशासन ने तत्काल राहत उपाय के तहत 110 गांवों में 115 सार्वजनिक कुओं का अधिग्रहण किया है. नरखेड़ तहसील के 23, काटोल के 18, उमरेड के 20 तथा कुही तहसील के 12 गांवों में गंभीर जलसंकट की स्थिति बनी हुई है.


Click above on our news logo to access the Daily E_Newspaper.
For articles or advertisements, contact us at: dineshdamahe86@gmail.com.