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सड़कें बनती जा रही हैं मौत का रास्ता

– हादसों में लगातार जा रही अनमोल ज़िंदगियाँ

हिंगणघाट :- वर्धा जिले के हिंगणघाट तालुका में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। तेज़ रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना, यातायात नियमों की अनदेखी और खराब सड़कों के कारण आए दिन लोग सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। हाल के दिनों में हिंगणघाट–वर्धा मार्ग, कलोडे चौक स्थित नेशनल हाईवे, ग्रामीण संपर्क सड़कें और शहर की प्रमुख सड़कें हाई रिस्क ज़ोन बन चुकी हैं। इन हादसों में सबसे अधिक शिकार युवा वर्ग हो रहा है, जो काम या पढ़ाई के लिए घर से निकलता है और कई बार वापस लौट ही नहीं पाता।

स्थानीय नागरिकों ने एक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। D-Mart की ओर जाने के लिए कई वाहन चालक रॉन्ग साइड से वाहन चलाते हैं, जिससे सामने से आने वाले वाहनों से टक्कर की घटनाएँ बढ़ गई हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्रियों के लिए यह स्थिति जानलेवा बनती जा रही है।

इसके अलावा कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर अवैज्ञानिक हैं चेतावनी संकेतक व सूचना बोर्ड नहीं लगे हैं

रात के समय स्ट्रीट लाइट बंद रहती है नेशनल हाईवे पर भारी वाहनों की बेकाबू आवाजाही जारी है

हादसे के बाद एम्बुलेंस के देर से पहुँचने का मुद्दा सबसे गंभीर बनकर सामने आ रहा है। कई बार दुर्घटना के बाद एंबुलेंस समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुँच पाती। कुछ मामलों में एंबुलेंस आने से पहले ही घायल की मौत हो जाती है, तो कई घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल ले जाना पड़ता है। ‘गोल्डन आवर’ में इलाज न मिल पाने के कारण कई ज़िंदगियाँ बचने के बावजूद चली जाती हैं, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सरकारी एंबुलेंसों की संख्या कम होना, कॉल रिस्पॉन्स में देरी, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की कमी और ट्रैफिक में एंबुलेंस को रास्ता न मिलना — ये सभी कारण स्थिति को और भयावह बना रहे हैं।

हर दुर्घटना के बाद प्रशासन द्वारा जांच के आदेश तो दिए जाते हैं, लेकिन स्थायी और ठोस समाधान अब तक नजर नहीं आया है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतज़ार कर रहा है?

अब समय आ गया है कि सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए। सख़्त यातायात नियमों का पालन, D-Mart क्षेत्र में रॉन्ग साइड आवाजाही पर कड़ी कार्रवाई, उचित एंट्री-एग्ज़िट व्यवस्था, सड़क सुधार कार्य, कलोडे चौक जैसे स्थानों पर स्थायी ट्रैफिक पुलिस तैनाती और समय पर व सुसज्ज एंबुलेंस सेवा — यही हादसों पर ब्रेक लगा सकती है। क्योंकि सड़कें जीवन जोड़ने के लिए होती हैं,ज़िंदगियाँ छीनने के लिए नहीं.


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