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कॉलेजों में कंप्यूटर आधारित कौशल पाठ्यक्रम के लिए बनेगी नियमावली

– जरूरी पाठ्यक्रमों का समूह भी तैयार होगा

– नागपुर विद्यापीठ के कुलगुरु का आश्वासन, विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से परिचित कराना समय की मांग

नागपुर :- एक ओर उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने की पहल की जा रही है, वहीं नई शिक्षा नीति के तहत कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में नागपुर विद्यापीठ ने अपने सभी संबद्ध कॉलेजों में कंप्यूटर आधारित कौशल पाठ्यक्रम के लिए नियमावली तैयार करने का कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने आश्वासन दिया है। विद्यापीठ का उद्देश्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध हो सके, ताकि वे बदलते तकनीकी दौर में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बन सकें। इसके लिए कॉलेजों में ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, जिनसे छात्रों को कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी मिल सके। इसके साथ ही विद्यापीठ आवश्यक कंप्यूटर कौशल आधारित पाठ्यक्रमों का एक समूह भी तैयार करेगा, जिसे कॉलेज अपने स्तर पर लागू कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को रोजगार उन्मुख शिक्षा प्रदान करना और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। कंप्यूटर आधारित कौशल पाठ्यक्रम शुरू होने से विशेष रूप से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे उन्हें नई तकनीकों की समझ विकसित करने और रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होने में मदद मिलेगी।

विद्यापीठ में 6 मार्च 2026 को हुई सीनेट बैठक में यह जानकारी सामने आई कि 24 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार किया गया था। हालांकि, बोर्ड ऑफ स्टडीज ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अस्वीकार कर दिया। इस मुद्दे को लेकर सीनेट बैठक में सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया। सीनेट सदस्यों का कहना था कि यह एक ऐच्छिक पाठ्यक्रम है और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को रोजगारोन्मुख शिक्षा देने तथा उन्हें आधुनिक तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर प्रदान करने के लिए यह आवश्यक है। इसके बावजूद प्रस्ताव को अस्वीकार करना उचित नहीं है। सदस्यों ने यह भी सुझाव दिया कि यदि 5 हजार रुपये फीस अधिक लगती है तो विद्यापीठ फीस कम करने पर विचार करे। साथ ही केवल कंप्यूटर प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर कौशल आधारित पाठ्यक्रमों का एक समूह भी तैयार किया जाए।

विवाद के बाद प्रस्ताव पर पुनर्विचार का निर्णय

कंप्यूटर प्रशिक्षण को लेकर सीनेट सदस्यों द्वारा विरोध किए जाने के बाद आखिरकार कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने इस प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए फिर से बोर्ड ऑफ स्टडीज के पास भेजने का निर्णय लिया। साथ ही कुलगुरु ने यह भी आश्वासन दिया कि विद्यापीठ के संबद्ध कॉलेजों में कंप्यूटर आधारित कौशल पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए जल्द ही एक विस्तृत नियमावली तैयार की जाएगी। नागपुर विद्यापीठ में 21 मार्च 2025 को हुई सीनेट बैठक में कॉलेजों में कंप्यूटर प्रशिक्षण शुरू करने के लिए प्रति छात्र 5 हजार रुपये फीस लेने का प्रस्ताव रखा गया था। बैठक में यह भी कहा गया कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को कंप्यूटर प्रशिक्षण का अवसर मिलना चाहिए, इसलिए इस पाठ्यक्रम को ऐच्छिक रूप से शुरू किया जाए। सीनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए आगे की कार्रवाई के लिए इसे बोर्ड ऑफ स्टडीज के पास भेजने का निर्णय लिया था।


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