– यातायात हो जाता है अस्त-व्यस्त, 500 से अधिक लगती हैं दुकानें
नागपुर :- कारीगरों के काम आने वाला पाना, पेंचिस हो या हाईटेक मोबाइल, लैपटॉप या फैशनेबल जींस, टी शर्ट, सभी चीजें शहर में कहीं एक जगह मिलेंगी तो एक ही नाम सामने आएगा वह है शनिचरा बाजार. समय या चलन के साथ पुरानी हो चुकी कई चीजें यहां ढूंढने से मिल जाएंगी. बोलचाल की भाषा में ‘चोर बाजार’ के नाम से भी पहचाना जाने वाला यह मार्केट आज समय के साथ फैलता जा रहा है. पहले बाजार सिर्फ एम्प्रेस माल की रेंज तक ही सीमित था लेकिन अब यह धीरे-धीरे बढ़ते हुए टाटा पारसी स्कूल की रेंज तक पहुंच गया है. शनिवार को मार्केट लगते ही सड़क पूरी तरह से गायब हो जाती है. यातायात तो अस्त-व्यस्त होता है साथ ही पैदल चलने वालों का चलना भी मुश्किल हो जाता है.
जानकार बताते हैं कि यह बाजार कई दशकों से लग रहा है. पूरे विदर्भ में इतना बड़ा बाजार और कहीं नहीं लगता. महाराष्ट्र में मुंबई के बाद अपनी तरह का यह दूसरा बाजार है. पूरे विदर्भसे लोग यहां खरीदी करने आते हैं.
पहले इस बाजार में सिर्फ कबाड़ व लोहे की वस्तुएं ही मिला करती थीं लेकिन जिस तरह से समय बदला उसी तरह यह बाजार भी पूरा हाईटेक हो गया है. आज यहां लोहे, कबाड़ के साथ-साथ कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, की-बोर्ड, मोबाइल, कैमरा जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम से लेकर अन्य काम की वस्तुएं भी कम दाम में मिल जाती हैं जो लोग बाहर से महंगी वस्तुएं नहीं ले पाते वे यहां का रुख करते हैं.
मार्ग से पैदल चलना हो जाता है मुश्किल : हर शनिवार को लगने वाला यह बाजार सुबह से ही सज जाता है, जो कि शाम तक रहता है. इसके चलते शनिवार को इस मार्ग से पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है. यहां पर आने वाले ग्राहकों के लिए कोई सुलभ शौचालय तक की सुविधा नहीं है. जिसके चलते लोग बाहर आसपास ही गंदगी फैलाते नजर आते हैं.
आज तक नहीं मिली स्थायी जगह : वर्षों से यह मार्केट सड़क पर लग रहा है लेकिन इसे आज तक कोई स्थायी जगह नहीं मिल पाई है. ग्राहकों की सुविधाओं के लिए भी मार्केट में कुछ भी नहीं है. समय के साथ यह मार्केट काफी अधिक बढ़ गया है लेकिन इसकी सुविधाओं में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. आज भी यहां के व्यापारी प्रशासन से स्थायी जगह मांग कर रहे हैं. पहले यहां पर कुछ ही दुकानें हुआ करती थीं लेकिन आज 500 से अधिक दुकानें यहां पर लगती हैं.








