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एसबीएल ब्लास्ट: फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने HC में दी दखल याचिका

– उच्च स्तरीय जांच समिति में शामिल करने की मांग, मुफ्त में विशेषज्ञ सेवाएं देने की पेशकश

नागपुर :- नागपुर जिले के राउलगांव स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड में हुए भीषण विस्फोट की जांच को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। देश के वरिष्ठ फॉरेंसिक फायर एवं एक्सप्लोजन विशेषज्ञ नीलेश बलवंतराव उकुंडे ने इस मामले में हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका में हस्तक्षेप आवेदन दायर किया है। उन्होंने केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति में शामिल किए जाने की मांग की है।

उकुंडे का कहना है कि इस तरह के बड़े औद्योगिक विस्फोटों के वास्तविक कारणों का पता लगाना अत्यंत तकनीकी और विशेषज्ञता वाला कार्य है। उनके अनुसार वर्तमान जांच समिति में फॉरेंसिक फायर एवं विस्फोट जांच का विशेषज्ञ शामिल नहीं है, जिससे दुर्घटना के मूल कारणों तक पहुंचना कठिन हो सकता है।उकुंडे ने अदालत को बताया कि उन्होंने हादसे वाले दिन ही घटनास्थल का निरीक्षण किया था। इसके अलावा वीडियो, फोटो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर विस्फोट के संभावित कारणों पर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की, जिसे संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया। हालांकि, आगे की जांच प्रक्रिया में उन्हें शामिल नहीं किया गया।

बिना किसी शुल्क के देने को तैयार विशेषज्ञ सेवाएं:

उन्होंने हाई कोर्ट को बताया कि यदि उन्हें जांच समिति में शामिल किया जाता है तो वे बिना किसी पारिश्रमिक के अपनी विशेषज्ञ सेवाएं देंगे। उनके अनुसार यह उन मजदूरों के प्रति उनकी श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने इस हादसे में अपनी जान गंवाई। नीलेश उकुंडे को आग और विस्फोट से जुड़े 700 से अधिक मामलों की जांच का अनुभव है। उन्होंने नेशनल फायर सर्विस कॉलेज, नागपुर से फायर इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है तथा लगभग 23 वर्षों तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फायर, डिजास्टर एंड एनवायरनमेंट मैनेजमेंट, नागपुर में प्राचार्य के रूप में कार्य किया है। वे अमेरिका से यूएल (UL) प्रमाणित फायर फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी हैं। उन्होंने हाल के वर्षों में उज्जैन महाकाल मंदिर अग्निकांड, सिकंदराबाद जयपुर एक्सप्रेस आग, नागपुर स्थित सोलर इंडस्ट्रीज आरडीएक्स प्लांट विस्फोट और पुणे के एसवीएस एक्वा प्लांट विस्फोट जैसे मामलों की भी जांच की है। इसके अलावा 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए दंगों तथा 1993 मुंबई बम धमाकों के दौरान भी उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों में योगदान दिया था।

हाई कोर्ट से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील

उकुंडे ने हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को उन्हें उच्च स्तरीय जांच समिति में शामिल करने के निर्देश दिए जाएं। अब इस मामले में अदालत का निर्णय एसबीएल विस्फोट की जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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