सुशांत घाटे, चंद्रपुर :- चंद्रपुर जिले में परमिट रूम घोटाले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट शीतकालीन अधिवेशन में पेश किए जाने की संभावना के बाद शराब कारोबारियों और परमिट रूम धारकों में जबरदस्त हलचल शुरू हो गई है। इस घोटाले पर अंतिम रिपोर्ट SIT ने 31 जुलाई 2025 को राज्य सरकार को सौंप दी थी।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही जिले के प्रभावशाली मद्य व्यवसायियों के साथ-साथ परवाने मंजूर करने वाले कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकने की संभावना जताई जा रही है। विधान परिषद सदस्य सुधाकर अडबले ने इस घोटाले का मुद्दा पिछले अधिवेशन में ही उठाया था और अब वे शीतकालीन अधिवेशन में यह रिपोर्ट सदन में पेश करने की मांग कर सकते हैं।
ACB के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संदीप दिवाण के नेतृत्व में SIT का गठन 15 अक्टूबर 2024 को किया गया था। दारूबंदी हटाने के बाद परमिट मंजूरी में हुए कथित घोटालों और अनियमितताओं की गहराई से जांच करने की जिम्मेदारी इस पथक को सौंपी गई थी। जांच के दौरान SIT ने 49 शिकायतों की पड़ताल की, जिनमें से जन विकास सेना द्वारा सौंपी गई 177 पन्नों की विस्तृत शिकायत ने प्रशासन में हड़कंप मचा दिया था।
SIT ने शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए, राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के परमिट दस्तावेजों की जांच की और अतिरिक्त रेकॉर्ड मंगवाकर उनका विश्लेषण किया। जांच का दायरा बड़ा होने के कारण SIT को समय सीमा बढ़ाकर जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे।
अडबले ने आरोप लगाया कि 17 मई 2021 को राज्य सरकार ने जब चंद्रपुर जिले से दारूबंदी हटाई, तब करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ। “नए परमिट वितरण में नियमों और पात्रता की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन किया गया,” उन्होंने कहा।
साल 2015 में जिले में दारूबंदी लागू की गई थी, लेकिन उसका अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। उल्टा, अवैध शराब व्यापार और नकली मदिरा का कारोबार तेजी से बढ़ गया। आखिरकार 2021 में जब दारूबंदी हटाई गई, तो परमिटों की संख्या तेजी से बढ़ी — बंदी से पहले जहाँ 315 परमिट थे, वहीं कुछ महीनों में यह संख्या 750 हो गई, और 31 मार्च 2025 तक यह बढ़कर 846 तक पहुंच गई।
इन अनियमितताओं में संलिप्त होने के आरोप में ACB ने लाचखोरी के एक मामले में राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के तत्कालीन अधीक्षक संजय पाटिल, उप-निबंधक अधिकारी चेतन खरोड़े, और अबय खाताड को एक लाख रुपये की रिश्वत प्रकरण में गिरफ्तार किया था।
उपमुख्यमंत्री और राज्य उत्पाद शुल्क मंत्री अजित पवार ने भी विधानसभा में इस घोटाले की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बताया था कि गृह विभाग के माध्यम से SIT की स्थापना की गई है।
अडबले ने इस घोटाले को “प्रशासन में गहराई तक फैला हुआ भ्रष्टाचार” बताते हुए सभी दोषियों पर कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, जन विकास सेना के प्रमुख पप्पू उर्फ प्रदीप देशमुख ने रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने और संबंधित अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष सार्वजनिक होते ही परमिट मंजूरी में गड़बड़ी करने वाले कई अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है। साथ ही, नियमों का उल्लंघन कर हासिल किए गए सैकड़ों परमिट रद्द किए जा सकते हैं। शीतकालीन अधिवेशन नजदीक आते ही चंद्रपुर की “दारू लॉबी” में इस समय जबरदस्त खलबली मची हुई है।




