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वर्दी के पीछे ‘तानाशाही रवैये’ पर विराम , दुर्गापुर के ठाणेदार संदीप एकाडे की कंट्रोल रूम में रवानगी! 

चंद्रपुर :- खाकी की धौंस, जुबान पर अश्लीलता का जहर और व्यवहार में किसी तानाशाह जैसी हनक… चंद्रपुर जिले के सबसे विवादित ठाणेदार संदीप उत्तम एकाडे का ‘साम्राज्य’ आखिरकार ढह गया है। जिस वर्दी को जनता की सेवा की कसम दिलाई गई थी, उसे अपनी सनक का औजार बनाने वाले इस अधिकारी को सूत्रों के अनुसार पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन ने तडकाफडकी हटाकर ‘कंट्रोल रूम’ का रास्ता दिखा दिया है। यह तबादला महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस ‘तानाशाही’ का अंत है जिसने पुलिस विभाग की छवि को कालिख पोतने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी

बेरी के नीचे ‘गाना’ और जुल्म का ‘नगाड़ा’

चर्चा है कि संदीप एकाडे का इतिहास विवादों की स्याही से लिखा गया है। कोरपना थाने में तैनाती के दौरान एक युवक की बेरहमी से पिटाई के बाद भड़के जन-आक्रोश ने इसकी असलियत पहले ही उजागर कर दी थी। उस वक्त ‘बेरी के नीचे गाना’ गाकर अपनी सनक दिखाने वाले इस अधिकारी का ‘मारो 50 पट्टे’ वाला ऑडियो बताया जाता है कि वायरल हुआ था, जिससे लोगों के रोंगटे खड़े हो गए थे। करीब 10 महीने तक गुमनामी के अंधेरे (CRO) में रहने के बाद, इन्हें लगा था कि दुर्गापुर ठाणे की कमान मिलते ही फिर से ‘जुल्म का कटोरा’ भर जाएगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

वर्दी में छिपा ‘गिरगिट’ की चर्चा : दो महीने में ही शुरू किया तानाशाही का तांडव? 

दुर्गापुर की कमान संभालते ही एकाडे ने गिरगिट की तरह रंग बदलना शुरू कर दिया थाने के भीतर अपने ही मातहतों को सरेआम मां-बहन की गालियां देना और महिला कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करना चर्चा का विषय बना हुआ था। अनुशासन के नाम पर कर्मचारियों के मोबाइल चेक करना और सनक में आकर उनकी ड्यूटी कहीं भी लगा देना, इस अधिकारी के व्यवहार को लेकर सवाल खड़े करता रहा। ‘शार्दूल’ जैसे हथियारों को हाथ में लेकर सरेआम धुलाई करने के किस्सों की चर्चा आज दुर्गापुर की गलियों में होती रही है।

सरकारी खजाने पर डाका: कबाड़ के खेल में डूबी ईमानदारी?

सिर्फ अभद्रता ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार आरोप है कि थाने के भीतर जप्त किया गया लाखों रुपये का सरकारी माल—जिसमें पोकलेन मशीन के कीमती पार्ट्स, तांबा, एल्युमिनियम और लोहा शामिल था उसे बताया जाता है कि बिना किसी सरकारी नीलामी के एक कबाड़ वाले को बेच दिया गया। सरकारी तिजोरी को चूना लगाकर निजी जेब गरम करने के इस खेल की चर्चा नागपुर परिक्षेत्र के आईजी संदीप पाटिल के कानों तक भी पहुंचने की बात कही जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार SDPO प्रमोद चौगुले इस मामले की जांच कर रहे हैं।

नेताओं की ‘जी-हुजुरी’ और जनता से ‘बदसलूकी’

चर्चा है कि एक तरफ आम जनता और फरियादियों के साथ अड़ियल और गुस्सैल रवैया अपनाना, तो दूसरी तरफ रसूखदार नेताओं के चेलों के सामने ‘जी-हुजुरी’ करना—यही संदीप एकाडे का असली बायोडाटा बताया जाता है खुद को कानून से ऊपर समझने वाले इस अधिकारी ने अहंकार में आकर यहाँ तक कह दिया था कि “मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता”। लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं, और जब पाप का घड़ा भरता है, जब शिकायतें बढ़ती हैं तो वर्दी की चमक भी धुंधली पड़ने लगती है।

इंक्रीमेंट पर रोक और विभागीय जांच का शिकंजा

सूत्रों के अनुसार आईजी संदीप पाटील के कड़े रुख के बाद एसपी मुम्मका सुदर्शन ने न केवल इसे पदमुक्त किया, बल्कि शिकायत शाखा की जिम्मेदारी सौंपकर इसकी नकेल कस दी है इसके कारनामों को देखते हुए इंक्रीमेंट रोकने और विभागीय जांच शुरू करने की तैयारी भी की जा चुकी है। कुछ दिन पूर्व बताया जाता है कि अपनी खाल बचाने के लिए यह ठाणेदार नागपुर आईजी ऑफिस के चक्कर काट रहा था, लेकिन वहां इसकी दाल नहीं गली।

जनता ने फोड़े पटाखे: विदाई पर मना ‘जश्न’

जैसे ही एकाडे के तबादले की खबर फैली, दुर्गापुर इलाके में लोगों ने पटाखे फोड़कर और आतिशबाजी कर इस ‘आफत’ के टलने का जश्न मनाया। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि ऐसे सनकी और तानाशाह अधिकारियों की जगह पुलिस थानों में नहीं, बल्कि खुले मैदानों में होनी चाहिए ताकि खाकी की साख बची रहे।


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