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नागपुर में जल संकट की मार अब स्विमिंग पूलों पर

– पूल संचालकों का दावा—फिल्ट्रेशन और रीसाइक्लिंग से बचता है पानी

नागपुर :- शहर में गहराते जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट के बीच स्विमिंग पूल पर प्रतिबंध लगाने की आशंका से संचालकों की चिंता बढ़ गई है। बोरवेल के इस्तेमाल पर पाबंदियों और पानी बचाने के बढ़ते दबाव के बीच स्विमिंग पूल के उपयोग और जल संरक्षण को लेकर बहस शुरू हो गई है। संचालकों का कहना है कि सभी पूल को एक ही नजर से देखने के बजाय उनके जलस्रोत और पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

शहर में कुछ स्विमिंग पूल कुओं, बोरवेल या अंबाझरी जैसे स्रोतों से पानी लेते हैं, जबकि कुछ सीधे महानगरपालिका की जलापूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में पानी की उपलब्धता और उसके उपयोग के आधार पर अलग-अलग नियम लागू करने की मांग उठ रही है।

अंबाझरी के पानी का होता है उपयोग

जानकारों के अनुसार एनआईटी के स्विमिंग पूल में अंबाझरी से पानी लिया जाता है। पूल और शॉवर के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी घरेलू पेयजल आपूर्ति से अलग है।

स्विमिंग पूल को बार-बार खाली करके दोबारा भरने की धारणा सही नहीं है। आधुनिक व्यवस्था में पानी को फिल्ट्रेशन के जरिए साफ कर कई महीनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके अनुसार, पानी का नुकसान मुख्यतः छलकने और शॉवर के इस्तेमाल के दौरान होता है।

फिलहाल पूलसंचालकों को पूल बंद करने के संबंध में कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है। हालांकि, जिला प्रशासन, नागपुर महानगरपालिका या नागपुर सुधार प्रन्यास की ओर से निर्देश मिलने पर उनका पालन किया जाएगा।

आधुनिक तकनीक से पानी का पुनः उपयोग:

आधुनिक स्विमिंग पूल में पानी को फिल्टर करके दोबारा इस्तेमाल करने की व्यवस्था होती है। पहले पूल का पानी बार-बार बदलना पड़ता था, लेकिन अब क्लोज्ड-लूप सिस्टम के माध्यम से पानी की बर्बादी कम की जा सकती है। उचित रखरखाव, प्रभावी फिल्ट्रेशन और शॉवर के दौरान पानी की बचत जैसे उपायों से स्विमिंग पूल में पानी का अधिक कुशल उपयोग संभव है।

घरेलू इस्तेमाल में भी बचत जरूरी:

पूल संचालकों का कहना है कि जल संरक्षण के लिए केवल स्विमिंग पूल पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है। घरों में लंबे समय तक शॉवर लेना, दाढ़ी बनाते समय नल खुला छोड़ना और अन्य दैनिक गतिविधियों में पानी की बर्बादी रोकना भी जरूरी है।

इसके अलावा, वाहन धोने, बागवानी और अन्य गैर-पेयजल कार्यों के लिए उपचारित सीवेज जल का इस्तेमाल बढ़ाने की आवश्यकता जताई गई। बड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में भी ऐसी व्यवस्था अपनाकर पीने योग्य पानी की खपत कम की जा सकती है। शहर में जल संकट के बीच अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। स्विमिंग पूल पर किसी तरह की पाबंदी लागू होगी या नहीं, इस बारे में आधिकारिक निर्णय का इंतजार है। संचालकों की मांग है कि व्यापक प्रतिबंध लगाने के बजाय जलस्रोत, वास्तविक खपत और पानी के पुनर्चक्रण की व्यवस्था को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाए।

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