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सत्ता बचाने की चुनौती भाजपा-कांग्रेस के सामने

– अदालत से लेकर चुनाव मैदान तक : नगर निगम की प्रक्रिया फिर अटकी

अकोला :- नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के स्थानीय निकाय चुनावों में नेतृत्व कठिन होगा। ज़िले की पाँच नगर पालिकाओं में से तीन पर भाजपा का कब्ज़ा था, जबकि दो पर कांग्रेस का महापौर था। अब उस दबदबे को बनाए रखने की चुनौती भाजपा और कांग्रेस के लिए होगी। अन्य दलों के लिए अस्तित्व का प्रश्न होगा। अगर गठबंधन और मोर्चा नहीं बना, तो ज़िले में ज़्यादातर जगहों पर बहुरंगी लड़ाई के संकेत हैं। स्थानीय निकाय चुनावों की जंग शुरू हो गई है। ज़िले में पातुर नगर निगम की चुनाव प्रक्रिया अदालती कार्यवाही के कारण लंबित रखी गई थी। शेष अकोट, तेल्हारा, मुर्तिजापुर, बालापुर नगर निगमों और हिवरखेड़ व बार्शीटाकली नगर पंचायतों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है। इन चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई। 17 नवंबर तक आवेदन किए जा सकते हैं। फ़िलहाल, उम्मीदवारों के चयन को लेकर सभी दलों में घमासान चल रहा है। संभावित उम्मीदवारों का साक्षात्कार के ज़रिए चयन किया गया। गठबंधन और मोर्चे की तस्वीर साफ़ न होने के कारण, सभी दलों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा में महापौर और सदस्य पद के दावेदारों की भारी भीड़ है। पार्टी नेतृत्व को आरक्षण के हिसाब से साझा उम्मीदवार उतारने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। कांग्रेस में भी महापौर पद के दावेदारों में होड़ मची हुई है। वंचित ने भी दावेदारों से आवेदन आमंत्रित कर लिए हैं। उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुँच गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना ने भी अपने-अपने स्तर पर तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं।

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