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देश का अनोखा ‘पर्यटन स्थल’ अब बदहाली पर रो रहा है

नागपुर १२ :  देश का इकलौता ऐसा संरचनात्मक स्थल, जहाँ एक ही स्थान पर चार स्तरों पर यातायात व्यवस्था मौजूद है — नीचे सड़क, उसके ऊपर रेलवे ट्रैक, फिर ब्रिज और सबसे ऊपर मेट्रो लाइन। यह अद्वितीय निर्माण नागपुर के कामठी रोड स्थित कड़वी चौक गुरुद्वारे के पास स्थित है, जो एक ‘आधुनिक इंजीनियरिंग का चमत्कार’ माना गया। लेकिन अफसोस, यह गौरवशाली ढांचा अब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। क्योंकि इसके नीचे गंदगी का आलम है, गड्ढों की भरमार है।
इस ब्रिज के नीचे की सड़क की हालत बद से बदतर हो चुकी है। हर साल बारिश आते ही गड्ढों की भरमार हो जाती है, जो राहगीरों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनती है। स्कूल बसें, ऑटो, दोपहिया वाहन और सैकड़ों गाड़ियाँ रोज़ इसी मार्ग से गुजरती हैं। कई बार स्कूली बच्चों की बैग तक पानी में गिर जाती हैं। ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है, जिससे स्कूल पहुंचने में देरी और लोगों को रोज़ाना मानसिक तनाव झेलना पड़ता है।
स्थायी समाधान की मांग
जेडआरयूसीसी सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. प्रवीण डबली ने प्रशासन से इस सड़क की मरम्मत का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। डॉ. डबली का कहना है कि, “हर बार लीपापोती कर दी जाती है, लेकिन स्थायी समाधान की ओर कोई कदम नहीं उठाया जाता। क्या प्रशासन को यह बदहाली नहीं दिखती? क्या इसे केवल बारिश के मौसम में ही याद किया जाएगा?”
रेलवे और मनपा की लापरवाही
जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले कच्चा डामरीकरण किया गया था, लेकिन पहली ही बारिश में सड़क की पोल खुल गई। रेलवे द्वारा डेढ़ साल तक यह मार्ग बंद रखा गया, लेकिन इसके बावजूद पुल की चौड़ाई न बढ़ाकर उल्टा और कम कर दी गई। अब तीसरी रेलवे लाइन के लिए भी पुलिया बना दी गई है, लेकिन उसकी भी न तो चौड़ाई बढ़ाई गई और न ही ऊंचाई।
यह भी बताया गया है कि पुल के नीचे पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर चाहे तो यहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाकर जलभराव की समस्या को दूर किया जा सकता है। रेलवे का कहना है कि सड़क निर्माण उनका कार्यक्षेत्र नहीं है, जिससे यह समस्या अनसुलझी रह गई है।
आखिर जिम्मेदार कौन?
यह प्रश्न अब नागपुरवासियों के सामने खड़ा है — आखिर इस ‘पर्यटन स्थल’ जैसी संरचना को बचाने और वहां की सड़क व्यवस्था को सुधारने की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? मेट्रो प्रबंधन, नगर निगम या रेलवे — तीनों संस्थाएं एक-दूसरे की ओर उंगली उठा रही हैं, लेकिन समाधान कोई नहीं दे रहा।


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