– नागपुर में आवारा पशुओं की समस्या का समाधान बनेगा नंदग्राम प्रकल्प
– 39.12 करोड़ के नंदग्राम प्रकल्प से शहर के तबेले होंगे बाहर
नागपुर :- भांडेवाड़ी में नंदग्राम प्रकल्प का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जिसे पूर्व महापौर दयांकर तिवारी का ड्रिम प्रोजेक्ट कहा जाता है. इस प्रकल्प का उद्घाटन अगले 6 महीनों में किया जाएगा. इससे शहर से गौशालाएं हट जाएंगी और सडक़ों पर आवारा पशुओं की समस्या का भी समाधान हो जाएगा.
स्मार्ट सिटी बनने की राह पर अग्रसर उपराजधानी में मवेशियों के तबेलों की वजह से नागरिक परेशान हैं. आवारा पशुओं की समस्या से छुटकारा पाने के लिए मनपा प्रशासन ने गुजरात की तर्ज पर भांडेवाड़ी के पास वाठोड़ा क्षेत्र में 44.०6 एकड़ भूमि पर 39.12 करोड़ रुपये का नंदग्राम प्रकल्प लागू करने का निर्णय लिया था. नागपुर शहर में 1०46 मवेशी तबेले हैं. इनमें से 457 अधिकृत और 589 अनधिकृत हैं. व्यस्त और आवासीय क्षेत्रों में स्थित मवेशी तबेलों के कारण नागरिक परेशान हैं. स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है. कई पशुपालक अपने पशुओं को खुला छोड़ देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए, मवेशियों के तबेलों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए नंदग्राम प्रकल्प का प्रस्ताव रखा गया था. प्रारंभ में, इस प्रकल्प को गोरेवाड़ा क्षेत्र में 2० हेक्टेयर निजी भूमि पर लागू करने का निर्णय लिया गया था. हालांकि, मनपा की वित्तीय स्थिति को देखते हुए, इस प्रकल्प को लागू करना संभव नहीं हो सका, इसलिए अब इसे वाठोड़ा क्षेत्र में मनपा की भूमि पर लागू करने का निर्णय लिया गया है. यहां प्रति 1० पशुओं के लिए 468 शेड बनाई जाएंगी. इसमें 4,68० पशुओं को रखने की व्यवस्था होगी. इसमें पशु चिकित्सालय, जलापूर्ति, दूध भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज आदि सुविधाएं होंगी.
नंदग्राम पूर्व महापौर और भाजपा शहरअध्यक्ष दयाशंकर तिवारी का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ है. तिवारी ने महापौर रहते हुए इस प्रकल्प को बढ़ावा दिया था. यह प्रकल्प नागरिकों को पशुओं की परेशानी से मुक्ति दिलाएगी. इस प्रस्ताव को रा’य सरकार को वित्तीय सहायता के लिए भेजा गया था. रा’य सरकार से 1०4 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. इस प्रकल्प का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और इसे जल्द ही लागू किया जाएगा.
इस प्रकल्प में चरागाह क्षेत्र और चरवाहों के लिए आवास सुविधाएं शामिल हैं.
सर्वेक्षण के अनुसार, शहर में 15 हजार पशु हैं. इनमें से 1०65 में से 589 अवैध तबेले हैं. कई गोपालक अपने पशुओं को खुला छोड़ देते हैं. इससे क्षेत्र के नागरिकों को असुविधा होती है और पशुओं के गोबर से शहर प्रदूषित भी होता है. खुले में चरने वाले पशु स्व’छता सर्वेक्षण में बाधा बन रहे हैं. इसके अलावा, खुले में चरने वाले पशुओं के कारण दुर्घटनाएं भी होती हैं. इनमें कई लोगों की जान जा चुकी है. सवाल यह उठता है कि इसे नियंत्रित करने की जिम्मेदारी किसकी है.




