– नदी पार कर ही पहुंचना पड़ता है गांव ;जनप्रतिनिधियों की अनदेखी
यासीन शेख, गोंदिया देवरी :- चुंबली नदी पर अब तक पुल का निर्माण नहीं होने के कारण नदी के पार स्थित चुंबली गांव के नागरिकों को पानी के बीच से रास्ता बनाकर गांव तक पहुंचना पड़ता है। इस गंभीर समस्या की ओर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का लगातार ध्यान न जाने से ग्रामीणों की विकास की उम्मीद अब तक अधूरी ही रह गई है।
सरकार देश के अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने की बात करती है, लेकिन गोंदिया जिले के देवरी तहसील के चुंबली गांव की वास्तविकता कुछ और ही बयां करती है। यह इलाका आज भी दुर्गम और अतिदुर्गम श्रेणी में आता है, जहां विकास की धारा अब तक नहीं पहुंच पाई है। देवरी तहसील का चुंबली गांव लंबे समय से विकास की राह देख रहा है। पुल के अभाव में गांव के लोगों को गांव से बाहर निकलने या तहसील मुख्यालय तक पहुंचने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी यहां के नागरिकों को संघर्ष करना पड़ रहा है।
पुल के अभाव में कई लोगों ने गंवाई जान
देवरी तहसील के चुंबली गांव तक पहुंचने के लिए चुंबली नदी को पार करना पड़ता है। हर वर्ष बारिश के मौसम में नदी पार करते समय किसी न किसी की जान जाने का खतरा बना रहता है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण यहां के नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित रह जाते हैं। यदि चुंबली नदी पर पुल का निर्माण हो जाए तो ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी और किसी को अपनी जान गंवाने का खतरा भी नहीं रहेगा।
ग्रामीणों ने कई बार शासन और प्रशासन से इस ओर गंभीरता से ध्यान देने तथा जल्द से जल्द पुल का निर्माण कराने की मांग की है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। देवरी तहसील के पालांदूर/जमी गांव से चुंबली नदी पार करने के बाद चुंबली गांव में आज भी विकास की किरण नहीं पहुंची है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए आज भी लोगों को नदी पार करनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी इस नदी पर पुल का निर्माण नहीं किया गया है। हर वर्ष बारिश के मौसम में इन गांवों का आसपास के क्षेत्रों और तहसील मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। पिछले कई दशकों से यहां के नागरिक चुंबली नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक विकास की धारा इन गांवों तक नहीं पहुंच पाई है। इसलिए ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं और विकास के लिए तरस रहे हैं।




