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विकास के दावे बड़े, लेकिन सावनेर-मालेगांव महामार्ग पर जनता की जान की कीमत कौन चुकाएगा?

– जनता का संदेश पहले सड़क बचाइए, फिर विकास के सपने दिखाइए!

– विकास के सपने या अधूरी सड़कें? सावनेर-मालेगांव महामार्ग पर जनता के सब्र का इम्तिहान?

सावनेर :- में एक ओर एयरोस्पेस हब, औद्योगिक कॉरिडोर, नए उद्योग, रोजगार और क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य के बड़े-बड़े सपने दिखाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर सावनेर-मालेगांव महामार्ग पर वर्षों से चल रहा निर्माण कार्य आज भी जनता के लिए परेशानी, जोखिम और असुरक्षा का कारण बना हुआ है। जनता का सीधा सवाल है कि जब वर्तमान में चल रहे महत्वपूर्ण प्रकल्प ही समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, तब नई-नई घोषणाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक आखिर कब पहुंचेगा?

कुछ महीने पहले इसी मार्ग पर एक ऑटो चालक की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी। इस मार्ग पर अब तक कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है और अनगिनत लोग घायल होकर अस्पताल पहुँच चुके हैं। दुखद बात यह है कि उस स्थानीय ऑटो चालक की मृत्यु के बाद जनता सड़क पर उतरी, चक्का जाम हुआ, भारी आक्रोश फूटा और जिम्मेदारों से जवाब मांगा गया। लोगों को उम्मीद थी कि इस घटना के बाद प्रशासन, संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि गंभीरता दिखाएंगे, निर्माण कार्य में तेजी आएगी तथा वैकल्पिक मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी जमीनी हकीकत में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता है.

स्थानीय स्तर पर अनेक सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि परियोजना की धीमी गति के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है, यह जनता को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। महीनों बीत जाने के बाद भी कार्य में अपेक्षित तेजी दिखाई नहीं दे रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।

सावनेर क्षेत्र की जनता की मांग स्पष्ट है — सबसे पहले सावनेर-मालेगांव महामार्ग का निर्माण कार्य और वैकल्पिक मार्ग युद्धस्तर पर पूरा किया जाए, यातायात सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और परियोजना की स्पष्ट समयसीमा सार्वजनिक की जाए। उसके बाद ही नए विकास प्रकल्पों और भविष्य के सपनों की बात की जाए।

यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दे सकता है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों में इस मुद्दे को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि उनकी सुरक्षा और सुविधाओं की लगातार अनदेखी की गई, तो लोकतांत्रिक तरीके से बड़े जनआंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है।

एयरोस्पेस हब के सपने, लेकिन सड़क पर मौत का साया!

जनता का सवाल है कि क्या किसी व्यक्ति की जान केवल कुछ दिनों की चर्चा, बैठकों और आश्वासनों तक ही सीमित है? क्या हर हादसे के बाद खानापूर्ति करना ही व्यवस्था का स्थायी तरीका बन गया है? दुर्घटना होते ही अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, बयान दिए जाते हैं, जांच और कार्रवाई के आश्वासन भी मिलते हैं, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं।

एक ओर क्षेत्र के विधायक डॉ. आशीष देशमुख विकास की बड़ी योजनाओं, नए उद्योगों और भविष्य के प्रकल्पों की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर सावनेर-मालेगांव महामार्ग का अधूरा निर्माण और वैकल्पिक मार्ग आज भी जनता के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। जनता पूछ रही है कि यदि क्षेत्र में करोड़ों रुपये के नए प्रकल्प लाए जा सकते हैं, तो इस महत्वपूर्ण मार्ग को समय पर पूरा कराने के लिए आवश्यक प्राथमिकता और प्रयास क्यों दिखाई नहीं दे रहे हैं?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क ही विकास की पहली शर्त होती है। यदि सड़क सुरक्षित नहीं होगी, तो उद्योगों तक कौन पहुंचेगा, रोजगार तक कौन पहुंचेगा और विकास का लाभ कौन उठा पाएगा? आज हालात ऐसे हैं कि यह मार्ग लोगों को विकास से अधिक अस्पतालों और श्मशानों की ओर ले जाता दिखाई दे रहा है। जो किसी भी विकासशील क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि एक दर्दनाक मौत के बाद भी वैकल्पिक मार्ग का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। इससे जनता का धैर्य टूटता जा रहा है और लोगों में यह भावना मजबूत हो रही है कि उनकी सुरक्षा और सुविधाएं अभी भी प्राथमिकता में नहीं हैं। जनता का मानना है कि पहले सड़क को सुरक्षित बनाया जाए, अधूरे कार्य पूरे किए जाएं और उसके बाद ही विकास के नए सपने दिखाए जाएं।

सवाल आज भी वही है — पहले सड़क या पहले सपने?

सावनेर की जनता का जवाब साफ है —

“पहले सड़क, फिर विकास की बातें। क्योंकि सड़क होगी, तभी जनता सुरक्षित रहेगी और तभी विकास की मंजिल तक पहुंच पाएगी।”


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