नागपूर :- विदर्भ में रेत नीलामी को लेकर राजनीतिक और व्यावसायिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र के कुछ प्रमुख व्यापारी और राजनीतिक हस्तियाँ इस प्रक्रिया में गहरी दिलचस्पी ले रही हैं। चर्चा यह भी है कि सत्ता पक्ष से निकट संबंध रखने वाले अज्जू नामक प्रभावशाली व्यवसायी पिछले कई वर्षों से रेत कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं चाहे वह नागपुर, भंडारा, गोंदिया या चंद्रपुर क्षेत्र हो, इनका प्रभाव हर जगह महसूस किया गया है। यह पुराना समूह, जो पहले भी रेत कारोबार में सक्रिय रहा है, अब एक बार फिर नई बोली प्रक्रिया में उतरने की तैयारी कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक, कामठी निवासी अज्जू नामक प्रमुख व्यवसायी, जिन्हें सत्ता पक्ष का करीबी माना जाता है और जो लंबे समय से विभिन्न कारोबारी गतिविधियों में संलग्न हैं, इस वर्ष भी रेत व्यवसाय में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे एक समूह के साथ आगामी नीलामी में भाग ले सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार की रेत नीति में कुछ संशोधन ऐसे हैं जिन पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है।
जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में चंद्रपुर जिले में हुई रेत नीलामी प्रक्रिया को लेकर भी कई स्तरों पर चर्चा हुई थी। कुछ सूत्रों का दावा है कि उस समय नीति के पालन और ई-ऑक्शन प्रक्रिया से जुड़ी कुछ तकनीकी समस्याएँ सामने आई थीं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इन मुद्दों की जानकारी संबंधित विभागों तक पहुँची थी और अब नई नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं।
इस विषय पर प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि रेत नीलामी नीति में पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए जा रहे हैं। “सभी नीलामियाँ नियमानुसार हों, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा।
वहीं, स्थानीय स्तर पर यह विषय आम चर्चा का केंद्र बना हुआ है। क्षेत्रीय नागरिकों का मानना है कि रेत कारोबार में पारदर्शिता बनी रहना न केवल सरकार के राजस्व की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे पर्यावरणीय नियमों का पालन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।




