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वीसीए ग्राउंड बना वीआईपी कैफे ज़ोन, ट्रैफिक नियमों पर उठे गंभीर सवाल 

– मार्ग पर दिनभर ट्रैफिक जाम, सेटिंग की चर्चा तेज

नागपूर :- सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित वीसीए ग्राउंड परिसर शहर का एक प्रमुख और संवेदनशील इलाका माना जाता है। के. नायडू रोड पर स्थित यह मार्ग प्रशासनिक कार्यालयों, वरिष्ठ अधिकारियों के निवास और लोकप्रिय फूड कॉम्प्लेक्स के कारण दिनभर व्यस्त रहता है।

शहर के वीसीए ग्राउंड परिसर, के. नायडू रोड, सिविल लाइंस स्थित फूड कॉम्प्लेक्स के आसपास इन दिनों ट्रैफिक जाम गंभीर समस्या बन गया है। कॉफी और फास्ट फूड के लिए प्रसिद्ध इस मार्ग पर दोपहर 12 बजे से लेकर रात 11 बजे तक लगातार वाहनों की भीड़ बनी रहती है। सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग के कारण आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां दिनभर वीवीआईपी से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी—जैसे पुलिस आयुक्त और कलेक्टर—का आवागमन होता रहता है। इसके बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता।

सबसे हैरानी की बात यह है कि ट्रैफिक विभाग की गाड़ियां दिनभर इस मार्ग से गुजरती रहती हैं, लेकिन अवैध और तिरछी पार्किंग करने वाले रसूखदारों के वाहनों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती। क्षेत्र में चर्चा है कि ट्रैफिक अमले और कुछ व्यापारियों के बीच “सेटिंग” के चलते केवल औपचारिक चेतावनी देकर आगे बढ़ जाया जाता है। यदि ऐसा है तो यह कानून के समान अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

वहीं, लिबर्टी चौक के पास यदि कोई सामान्य नागरिक वाहन खड़ा कर दे तो तुरंत जामर लगाकर या चालान काटकर कार्रवाई की जाती है। परंतु वहीं से मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित वीसीए ग्राउंड परिसर के पास अव्यवस्थित और अवैध पार्किंग के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। इससे दोहरे मापदंड अपनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है और आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जनता में सवाल उठ रहा है कि जब उच्च अधिकारी स्वयं इसी मार्ग से गुजरते हैं, तो अव्यवस्थित पार्किंग और जाम की समस्या पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या कानून केवल आम जनता के लिए ही सख्त है?

शहरवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि:

इस मार्ग पर स्थायी नो-पार्किंग ज़ोन घोषित किया जाए।

प्रभावशाली व्यक्तियों पर भी समान रूप से दंडात्मक  नियमित और निष्पक्ष चालान कार्रवाई हो।

कार्रवाई की जाए।

वैकल्पिक पार्किंग स्थल चिन्हित किए जाएं।

यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या भविष्य में और गंभीर रूप ले सकती है। अब जिम्मेदार अधिकारियों की परीक्षा है कि वे कानून की निष्पक्षता साबित करते हैं या नहीं।

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