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सावनेर में चुनाव प्रचार में खुलेआम नियम उल्लंघन! अनाधिकृत बैनरों से सजा शहर, प्रशासन मौन..

– सत्ता के दबाव में प्रशासन निष्क्रिय हो गया है?

सावनेर :- नगर में चल रहे चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग के नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। शहर के कई हिस्सों में बिना अनुमति लगे अनाधिकृत बैनर, होर्डिंग्स और पोस्टर बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं। विशेष रूप से राष्ट्रीय पार्टियों सहित कई उम्मीदवारों के बैनर बिजली खंभों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों पर लगे पाए गए हैं। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) और Defacement of Property Act के अनुसार निम्न स्थानों पर बिना अनुमति प्रचार सामग्री लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद सावनेर शहर में बैनर बिजली खंभों पर लगाए जा रहे हैं, और कुछ स्थानों पर मंदिरों की दीवारों पर भी प्रचार सामग्री देखने में आ रही है। नियमों के अनुसार किसी भी सार्वजनिक स्थान, विद्युत खंभे या सरकारी संपत्ति पर बिना अनुमति प्रचार सामग्री लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है।फिर भी सावनेर प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में अधिकारी मौन दिखाई दे रहे हैं। यदि नियमों की यह अनदेखी जारी रही, तो स्थानीय नागरिकों द्वारा स्थानिक चुनाव अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच की मांग भी उठाई जा सकती है।

स्थानीय नागरिकों के मन में उठते गंभीर सवाल

अनाधिकृत बैनरों की बढ़ती संख्या और प्रशासन की निष्क्रियता को देखते हुए नागरिकों में गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता दोनों पर प्रश्नचिह्न लग जाएंगे। नागरिकों द्वारा उठाए जा रहे प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं—क्या सत्ता के दबाव में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है? कार्रवाई न होने से यह संदेह और गहरा होता जा रहा है। क्या चुनाव आयोग के नियम और आचारसंहिता सावनेर में सिर्फ नाम मात्र के लिए रह गए हैं? शहर भर में खुलेआम नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद कोई रोक-टोक दिखाई नहीं दे रही। क्या अधिकारियों की अनदेखी ने नियमों के उल्लंघन को बढ़ावा दिया है? यह प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थिति लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा आघात करेगी।

नागरिकों की मांग – सभी अवैध बैनरों को तुरंत हटाया जाए।

नियमों की अनदेखी करने वाले संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

चुनाव में भाग लेने वाले सभी राजनीतिक दलों पर समान नियम लागू किए जाएँ।

ECI गाइडलाइन का पालन अनिवार्य

ECI गाइडलाइन का पालन न करना अपराध माना जाता है, और कार्रवाई न करने पर स्थानीय चुनाव अधिकारी भी प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार होते हैं। चुनाव आयोग के नियम स्पष्ट बताते हैं कि अनधिकृत बैनर, पोस्टर या किसी भी प्रकार की अवैध प्रचार सामग्री लगाने पर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जुर्माना भी निर्धारित है। इसलिए नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर विभागीय जांच की संभावना बन सकती है, जबकि अवैध बैनर लगाने वाले व्यक्तियों और संबंधित राजनीतिक दलों पर भी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बावजूद मौजूदा स्थिति में अधिकारी पूरी तरह मौन दिखाई दे रहे हैं, जिससे नागरिकों में रोष और संदेह दोनों बढ़ रहे हैं।


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