– 1994 के संशोधन के खिलाफ मनोज जरांगे का एल्गार
छत्रपति संभाजीनगर :- मराठा आरक्षण का मुद्दा अब गरमा गया है। उन्होंने हैदराबाद गजेटियर लागू करने के लिए 2 सितंबर के आरक्षण संशोधन को चुनौती देने का फैसला किया है, इसलिए हम 1994 के आरक्षण संशोधन को रद्द करने की भी मांग करेंगे। इसके बाद हम मांग करेंगे कि 250 जातियों को आरक्षण में शामिल किया गया है, उन्हें भी बाहर किया जाए, मराठा आरक्षण संघर्ष के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने शुक्रवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में चेतावनी दी। शहर के एक निजी अस्पताल में बिगड़ती सेहत के कारण भर्ती जरांगे-पाटिल ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि 1994 के इस आरक्षण संशोधन के अनुसार, धनगर और वंजारी जातियों को उप-वर्गीकृत करके आरक्षण दिया गया था। जरांगे ने वंजारी समुदाय को दिए गए दो प्रतिशत आरक्षण को रद्द करने की मांग की है। जारंगे ने कहा कि वह यह भी मांग करेंगे कि ‘फर्जी जातियों’ और ‘प्रगतिशील जातियों’ को आरक्षण से बाहर किया जाए।
मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर उबाल पर है, और इस बार इसका केंद्र बना है छत्रपति संभाजीनगर। मराठा आरक्षण संघर्ष समिति के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा ऐलान करते हुए सरकार को खुली चेतावनी दी है। उनका कहना है कि सरकार ने 2 सितंबर को जो आरक्षण संशोधन लागू किया है, वह मराठा समाज के हितों के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
जरांगे पाटिल का आरोप है कि सरकार ने हैदराबाद गजेटियर के आधार पर जो निर्णय लिया है, वह पूरी तरह असंवैधानिक है। उन्होंने इसे चुनौती देने का ऐलान किया है। साथ ही, उन्होंने 1994 में लागू किए गए आरक्षण संशोधन को भी रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस पुराने संशोधन के चलते मराठा समाज को अब तक आरक्षण से वंचित रखा गया है। मनोज जरांगे पाटिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानीं, तो वे उन 250 जातियों की सूची को चुनौती देंगे, जिन्हें आरक्षण का लाभ मिल रहा है। उनका तर्क है कि जब तक मराठाओं को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक किसी और को भी आरक्षण का लाभ नहीं लेने देंगे। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
सरकार के सामने नई चुनौती
जरांगे पाटिल के इस बयान ने मराठा आरक्षण आंदोलन को एक नई ऊर्जा दे दी है। अब देखने वाली बात होगी कि महाराष्ट्र सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। पहले भी मराठा आरक्षण को लेकर राज्य में कई बार आंदोलन हुए हैं, और यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला तो यह मुद्दा फिर से सड़कों पर उतर सकता है।








