– डीआरएम कार्यालय का घेराव, वेतन, पीएफ और ईएसआईसी की जांच की मांग
नागपुर :- नागपुर रेलवे स्टेशन पर कोचों में वाटरिंग का काम करने वाले कामगारों को कथित रूप से कम वेतन देने और पीएफ, ईएसआईसी तथा बीमा जैसी सुविधाओं से वंचित रखने के मामले में शिवसेना ने आवाज उठाई। नितिन तिवारी के नेतृत्व में शिवसैनिकों और कामगारों ने मध्य रेलवे के डीआरएम कार्यालय का घेराव कर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिवसेना का आरोप है कि ‘जय मां गंगे’ नामक ठेकेदार द्वारा कामगारों को निर्धारित नियमों के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा उन्हें आवश्यक श्रमिक सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है और कामगारों पर दबाव बनाया जा रहा है। इस दौरान नितिन तिवारी ने सवाल उठाया कि जब पिछले ठेकेदार के कार्यकाल में कामगारों को नियमानुसार वेतन मिल रहा था, तो पिछले करीब छह महीनों में ऐसी क्या परिस्थितियां पैदा हुईं कि नए ठेकेदार के आने के बाद वेतन में कथित कटौती की जा रही है। उन्होंने इस पूरे मामले में रेलवे के कुछ संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया।
तिवारी ने पिछले छह महीनों की उपस्थिति, पोजीशन शीट, वेतन भुगतान, पीएफ, ईएसआईसी और ठेकेदार के बिलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही जांच में किसी अधिकारी या ठेकेदार की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिवसेना ने चेतावनी दी कि यदि इस माह कामगारों के खातों में नियमानुसार पूरा वेतन जमा नहीं किया गया और किसी कामगार को धमकी देकर काम से हटाया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। तिवारी ने रेलवे का चक्काजाम करने की चेतावनी भी दी।
घेराव के दौरान डीआरएम विनायक गर्ग ने मामले का संज्ञान लेते हुए एडीआरएम को पूरे प्रकरण की जांच कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही पात्र कामगारों को उनके वैधानिक लाभ दिलाने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने को कहा। आंदोलन में मुन्ना तिवारी, अब्बास अली, आशीष हाडगे, ललित बावनकर, कार्तिक करोसिया, मुकेश सूर्यवंशी, आकाश शिर्के, प्रणिता क्षीरसागर, संजय सिंह और अमजद पटेल सहित बड़ी संख्या में कामगार एवं शिवसैनिक शामिल हुए।








