– पारधी समाज की पीड़ा सुन भावुक हुईं आदिवासी आयुक्त लीना बंसोड
– तीन घंटे चली बैठक में कार्यकर्ताओं ने रखीं समस्याएं
नागपुर :- ‘क्या हम अपराधी बनकर जन्मे हैं और अपराधी बनकर ही मरेंगे? हम भी इंसान हैं, हमें इंसान की तरह जीने दो।’ पारधी समाज के एक कार्यकर्ता की इस भावुक पुकार ने आदिवासी आयुक्त लीना बंसोड को भी भावुक कर दिया। नाशिक में आयोजित बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे पारधी समाज के कार्यकर्ताओं ने अपनी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक समस्याएं उनके सामने रखीं।
करीब तीन घंटे चली इस बैठक में राज्यभर के 80 से 100 कार्यकर्ता ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। नागपुर, अमरावती, यवतमाल, बुलढाणा, अकोला, सोलापुर, सातारा, धाराशिव, पुणे और अहिल्यानगर सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने समाज की मौजूदा परिस्थितियों और लंबे समय से लंबित समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। बैठक के दौरान पुणे-बारामती के सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र भोसले ने कविता और अपने जीवन के अनुभवों के माध्यम से पारधी समाज की पीड़ा बयां की। समाज को आज भी अपराधी दृष्टि से देखे जाने और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष करना पड़ने की बात रखते हुए वे भावुक हो गए। उनकी व्यथा सुनकर आयुक्त लीना बंसोड भी भावुक हो उठीं।
आयुक्त बंसोड ने व्यस्त कार्यक्रम और विदेश यात्रा की तैयारियों के बावजूद कार्यकर्ताओं को करीब तीन घंटे का समय दिया और सभी की समस्याएं ध्यानपूर्वक सुनीं। इस दौरान नागपुर की अपर आयुक्त आयुषी सिंह सहित आदिवासी विकास विभाग के अन्य अपर आयुक्त और परियोजना अधिकारी उपस्थित थे।
पारधी परिवार सर्वेक्षण पर भी चर्चा
बैठक में पारधी समाज की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति जानने के लिए राज्यभर में किए जा रहे पारधी परिवार सर्वेक्षण पर भी चर्चा हुई। आयुक्त बंसोड ने अधिकारियों को सर्वेक्षण गंभीरता से पूरा करने और कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए सुझावों पर ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से समाज की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और उसके आधार पर पारधी विकास पैकेज का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा।
बैठक में समाज के बच्चों की शिक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। जंगलों से सटे गांवों और बड़े शहरों में पारधी समाज के बच्चों के भीख मांगने की स्थिति पर चिंता जताते हुए समशेर फाउंडेशन की ओर से राज्यभर में ‘क्रांतिवीर समशेर सिंह पारधी शिक्षा जागर यात्रा’ तथा ‘भीख नहीं, शिक्षा चाहिए’ अभियान चलाने की मांग की गई।…
सरकारी योजनाओं का लाभ समाज को मिले
कार्यकर्ताओं ने शिक्षा, सामाजिक सम्मान, आर्थिक स्थिति में सुधार और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता बताई। अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं के सुझाव दर्ज किए और सर्वेक्षण में सहयोग करने की अपील की।
बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा विशेषज्ञ हेरंब कुलकर्णी, समशेर फाउंडेशन के अध्यक्ष अनिल पवार, अतिश पवार, राहुल राजपूत, निकेश माली, रोहित गोरामन, आदिवासी फासे पारधी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कश्मीर शिंदे, अंकुश राठौड़, शिला शिंदे, रवींद्र भोसले, केशव पवार, मंगेश भोसले, बाबू सिंह पवार, बजरंग ताठे, राजेंद्र काले, नामदेव भोसले और मतीन भोसले सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के अंत में आयुक्त बंसोड ने पारधी समाज के प्रतिनिधियों के साथ आत्मीयता से भोजन भी किया। इस संवाद से समाज के कार्यकर्ताओं में अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है। हालांकि, अब इन आश्वासनों का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है, इस पर पूरे पारधी समाज की नजर रहेगी।








