– 6 हज़ार करोड़ के घोटाले से हिल गया बैंकिंग सिस्टम
नागपुर :- यवतमाल जिला केंद्रीय सहकारी बैंक इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। बैंक में पिछले कई वर्षों से चल रहे घोटालों और कुप्रबंधन के चलते स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि अब आने वाले महीनों में बैंक के बंद होने की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, बैंक ने किसानों को नया ऋण देना पूरी तरह से बंद कर दिया है। इससे जिले के हजारों किसान मुश्किल में हैं, क्योंकि रबी सीज़न की तैयारी के लिए उन्हें वित्तीय सहायता की ज़रूरत है। बैंक के निदेशक मंडल और प्रबंधन पर आरोप है कि उन्होंने वर्षों से चल रही वित्तीय अनियमितताओं पर ध्यान नहीं दिया। पिछले 15 वर्षों में लगभग 6,000 करोड़ रुपये के ऋण डूबत खातों में चले गए हैं। इन खातों में अधिकांश बड़े ऋण हैं, जो प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक हस्तियों को दिए गए थे। छोटे किसानों और आम खाता धारकों को अब इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। यवतमाल के पूर्व महापौर और पांढरकवड़ा कृषि उत्पाद बाज़ार समिति के पूर्व अध्यक्ष संतोष बोरेले ने शनिवार को नागपुर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में सीधे तौर पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, बैंक में वर्षों से अनियमितताएँ चल रही हैं, लेकिन राजनीतिक संरक्षण के कारण किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। अगर यह रवैया जारी रहा, तो बैंक दिवालिया हो जाएगा और किसानों की मेहनत की कमाई डूब जाएगी।
बोरेले ने यह भी कहा कि सहकारी बैंक किसानों के हितों के लिए बनाया गया था, लेकिन आज यह राजनीतिक स्वार्थों और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है।
दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग
उन्होंने सरकार से मांग की कि बैंक की तत्काल ऑडिट जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस बीच, वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो बैंक को पुनर्गठन या विलय की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इससे हजारों खाता धारकों की जमा राशि खतरे में पड़ सकती है। स्थानीय किसानों और सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार और रिज़र्व बैंक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि बैंक को स्थिर किया जा सके और किसानों को राहत मिल सके।




