– 10 करोड़ का गबन या प्रशासनिक लापरवाही?
– घोटाले की सुगबुगाहट: , जांच की मांग तेज
– रेत की चोरी या राजस्व की हानि? परशिवनी तालुका में जांच की मांग तेज
नागपुर (प्रतिनिधि) :- परशिवनी तालुका के सावली बी और साहोली डिपो से जुड़ा एक गंभीर रेती प्रकरण इन दिनों जिले में व्यापक जनचर्चा का विषय बना हुआ है। लोकचर्चा के अनुसार, लगभग 11,000 ब्रास से अधिक रेत के चोरी या अवैध रूप से बेचे जाने की आशंका जताई जा रही है, जिसकी संभावित बाजार कीमत ₹10 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्य में सत्ता किसी भी दल की रही हो, नागपुर जिले में रेत से जुड़े घोटालों से कोई अछूता नहीं रहा है। यह वही क्षेत्र है जहाँ भाजपा नेताओं ने पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान तत्कालीन विधायक सुनील केदार के करीबियों पर रेत तस्करी के आरोप लगाए थे। लेकिन अब उसी राजनीतिक दल के एक वरिष्ठ मंत्री के कुछ समर्थकों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने जिला प्रशासन के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी राजस्व को हानि पहुँचाने का सुनियोजित प्रयास किया।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले हुए रेती चोरी प्रकरण में कई लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है। उस समय पुलिस प्रशासन, एसटीआई (STI), और ईडी (ED) जैसी जांच एजेंसियाँ सक्रिय रूप से शामिल थीं। इनमें कई पूर्व प्रभावशाली नेताओं के नाम भी सामने आए थे। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समय रेत प्रकरण से जुड़े एक युवक ने आत्महत्या तक कर ली थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन इस घटना की चर्चा आज भी स्थानीय स्तर पर जारी है।
रेत डिपो का अवैध आवंटन?
सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2025 में रेत डिपो की ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया कुछ त्रुटियों के कारण स्थगित कर दी गई थी। बाद में, दिनांक 15/07/2025 के शासनादेश के तहत सभी रेत डिपो को 15 अगस्त 2025 तक बंद करने और बचे हुए स्टॉक को लिलाव (नीलामी) पद्धति से बेचने के निर्देश दिए गए।
इस आदेश के बाद कुछ डिपो बंद कर दिए गए, जबकि कुछ में तकनीकी त्रुटियों का हवाला देकर प्रशासन ने विभिन्न डिपो से लगभग 45,000 ब्रास रेत अपने कब्जे में ले ली। इसके बाद कुछ शासकीय विभागों जैसे सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD), ग्रामविकास, सिंचाई आदि के कार्यों का हवाला देते हुए लगभग 32,000 ब्रास रेत का एकतरफा आवंटन कथित रूप से कुछ निजी कंपनियों को कर दिया गया।
जनता का आरोप है कि यह आवंटन सत्ता में बैठे एक वरिष्ठ मंत्री के करीबी लोगों को किया गया, जिसके चलते आम नागरिकों और ठेकेदारों को आज तक रेत की मांग पूरी नहीं हो सकी। लोगों का सवाल है कि जब आम जनता और अन्य शासकीय कार्यों के लिए रेत की आपूर्ति नहीं हो पा रही, तो मंत्री के करीबियों को इतनी बड़ी मात्रा में रेत आवंटित कैसे कर दी गई? जनता का मानना है कि यदि ऐसे ही नियमों को ताक पर रखकर विशेष सुविधाएँ दी जाती रहीं, तो यह व्यवस्था हर शासकीय ठेकेदार पर अन्याय साबित होगी।
नागपुर जिले को विशेष छूट और अनियमितताएँ
10 करोड़ का गबन या प्रशासनिक लापरवाही?
जानकारी के अनुसार, 11 से 23 सितंबर 2025 के बीच जारी कुल चार पत्रों के माध्यम से विशेष रूप से नागपुर जिले को छूट प्रदान की गई, जिसके अंतर्गत कुल 28,000 ब्रास रेत का आवंटन किया गया।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं और नागरिकों के आरोपों के अनुसार इस पूरे रेत लिफ्टिंग प्रकरण में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। नागरिकों का कहना है कि—
वे-ब्रिज, GPS ट्रैकिंग और CCTV कैमरों जैसी अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं किया गया।
बिना निविदा प्रक्रिया या सार्वजनिक सूचना के, कुछ चुनिंदा कंपनियों को रेत आवंटित की गई।
कई डिपो से रेत शासकीय कार्यों के नाम पर उठाई गई, किंतु वह खुले बाजार में लगभग ₹8,000 प्रति ब्रास के दर से बेची गई।
जनता की मांग है कि अब तक जितनी भी रेत लिफ्ट की गई है, उसकी विस्तृत जांच की जाए तथा जिन परियोजनाओं के नाम पर रेत जारी की गई, उनका स्थल निरीक्षण और ऑडिट कर यह सत्यापित किया जाए कि रेत वास्तव में उन्हीं कार्यों में उपयोग हुई या नहीं। साथ ही, यदि अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई के आदेश दिए जाएँ।
स्टॉक में कमी और अवैध बिक्री की आशंका
पूर्व डिपो धारक द्वारा सावली बी डिपो में ETS मापन के अनुसार 17,024.44 ब्रास रेत का स्टॉक दर्शाया गया था, जिसे 10 जून 2025 को मापन विभाग द्वारा भी दर्ज किया गया था। हालांकि, रेत लिफ्टिंग शुरू होने के बाद मात्र 1,200 ब्रास रेत ही उठाई गई, जबकि मौके पर केवल 3,000 से 4,000 ब्रास रेत ही उपलब्ध पाई गई। इस स्थिति ने यह आशंका और चर्चा तेज कर दी कि शेष रेत पहले ही बाजार में बेची जा चुकी थी।
स्टॉक की रातों-रात भरपाई की कोशिशें
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब स्टॉक में कमी उजागर हुई, तब इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए रातों-रात गरांडा रेत घाट से दो पोकलैन मशीनों और करीब आधा दर्जन ट्रकों की मदद से रेत का पुनर्भंडारण किया गया। बताया जाता है कि दिनांक 3 अक्टूबर 2025 की गूगल सैटेलाइट इमेज में इस घाट से रेत उठाने के निशान स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं, जो पूरे घटनाक्रम पर और भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।
प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण
जब इस विषय पर प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल किए गए, तो उन्होंने ETS गणना में त्रुटियों का हवाला देते हुए कहा कि सावली बी डिपो की ETS मोजणी में तकनीकी गलती (त्रुटि) हो सकती है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि सावली बी डिपो की ETS मोजणी दो बार किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में अधिकारी द्वारा दिया गया यह स्पष्टीकरण स्वयं इस बात की ओर संकेत करता है कि कहीं न कहीं दबाव तंत्र कार्य कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, दोनों मोजणियों में लगभग 17,000 ब्रास रेत ही दर्ज की गई, जबकि पूर्व डिपो धारक से कुल 17,014 ब्रास रेत जब्त की गई थी। यह स्थिति प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और सटीकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
जनता की चिंता
रेत जैसे कीमती प्राकृतिक संसाधन का यदि पारदर्शिता के साथ नियोजन और वितरण नहीं किया गया, तो यह न केवल शासन की साख को प्रभावित करता है, बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व हानि और पर्यावरणीय दुष्परिणामों का भी कारण बन सकता है। जिले में जनता अब इस विषय पर जवाबदेही और पारदर्शी जांच की कट्टर मांग कर रही है।




