– 13 साल बाद आया फैसला, कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुआ था हमला
नागपुर/गढ़चिरोली :- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में वर्ष 2013 में हुए झीरम घाटी हमले के मामले में जगदलपुर की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने 10 नक्सलियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने आपराधिक साजिश और हत्या के मामले में इन्हें दोषी ठहराया। एक दशक से अधिक समय से चल रहे इस मामले में बुधवार को सजा सुनाई गई।
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान 150 से अधिक सशस्त्र नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल तथा वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 10 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे, जबकि 38 लोग घायल हुए थे।
विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपियों को दोषी ठहराया। आपराधिक साजिश के लिए धारा 120-बी और हत्या के लिए धारा 302 के तहत उन्हें मृत्युदंड दिया गया।
ये हैं 10 दोषी नक्सली
दोषियों में प्रमिला मोडियाम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमिता उर्फ पुनेम मोडियाम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी उर्फ कोसराम, आयता मरकाम, मडकामी देवा, जोगा मडकामी, बंजामी सन्ना उर्फ चम्रू और महादेव नाग शामिल हैं। मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से एक की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। आरोपपत्र में नामजद 28 अन्य आरोपी अब भी फरार हैं।
महेंद्र कर्मा थे प्रमुख निशाने पर
एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार, महेंद्र कर्मा हमले के प्रमुख निशाने पर थे। नक्सल विरोधी अभियान ‘सलवा जुडूम’ में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। जांच के अनुसार, 2013 की शुरुआत में नक्सली नेताओं की बैठकों में कथित तौर पर ‘वर्ग शत्रुओं’ को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी और कर्मा को विशेष रूप से निशाना बनाया गया।
जांच में सामने आया कि नक्सलियों ने कांग्रेस के काफिले में शामिल एक बोलेरो वाहन के नीचे बारूदी सुरंग में विस्फोट किया था। विस्फोट से सड़क पर करीब पांच फीट गहरा गड्ढा हो गया। इसके बाद एक खराब ट्रक के जरिए रास्ता रोक दिया गया। काफिला फंसने के बाद पहाड़ियों से नक्सलियों ने गोलीबारी की और ग्रेनेड फेंके। हमला करीब दो घंटे तक चला। इसके बाद नक्सली सुरक्षाबलों के हथियार, कारतूस, ग्रेनेड और संचार उपकरण भी ले गए।
294 सुनवाई के बाद फैसला
हमले के दो दिन बाद एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ली। 25 सितंबर 2014 को नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ जगदलपुर की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसके बाद 28 सितंबर 2015 को 30 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। एक दशक से अधिक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कम से कम 294 सुनवाई हुईं। इसी महीने अंतिम बहस पूरी होने के बाद 5 सितंबर को अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। बुधवार को सजा तय करते हुए सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया।





