– 2010 के 6 से बढ़कर 447 हुए कृत्रिम टैंकों का आंकड़ा
नागपुर :- गणेश विसर्जन के लिए कभी तालाबों और झीलों का विकल्प छोड़ना लोगों को मुश्किल लगता था, लेकिन अब शहर में तस्वीर बदल रही है। नागपुर महानगरपालिका के ग्रीन गणेशोत्सव अभियान के तहत कृत्रिम विसर्जन टैंकों की संख्या वर्ष 2010 के छह से बढ़कर इस साल 447 हो गई है। स्वयंसेवी संस्थाओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लगातार जागरूकता अभियानों से नागरिकों में भी कृत्रिम टैंकों में विसर्जन को लेकर स्वीकार्यता बढ़ी है।
ग्रीन विजिल फाउंडेशन के संस्थापक कौस्तव चटर्जी ने बताया कि उनकी संस्था ने 2010 में मनपा के पर्यावरणपूरक गणेश विसर्जन अभियान से जुड़कर काम शुरू किया था। शुरुआती वर्षों में स्वयंसेवकों को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता था। कई श्रद्धालु निर्माल्य तक स्वयंसेवकों को देने के लिए तैयार नहीं होते थे। लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद लोगों की सोच में धीरे-धीरे बदलाव आया और पर्यावरणपूरक विसर्जन को समर्थन मिलने लगा।
दो साल में डेढ़ लाख से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन:
मनपा के मुख्य स्वच्छता अधिकारी डॉ. गजेंद्र महाले ने बताया कि महानगरपालिका ने शहर की सभी तालाबों पर बैरिकेडिंग कर प्रतिमा विसर्जन रोकने की व्यवस्था की है। पिछले दो वर्षों में कृत्रिम विसर्जन टैंकों में 1.5 लाख से अधिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया है और इस दौरान तालाबों में एक भी प्रतिमा विसर्जित नहीं की गई। इस वर्ष मनपा ने शहर में 225 स्थानों पर 447 कृत्रिम विसर्जन टैंक बनाए हैं। विसर्जन व्यवस्था संभालने और श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 998 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। डॉ. महाले ने कहा कि 16 वर्षों के प्रयास के बाद नागरिकों की सोच में आया बदलाव संतोषजनक है। उनका लक्ष्य ऐसा दिन देखना है, जब बैरिकेडिंग की आवश्यकता के बिना भी किसी झील में प्रतिमा विसर्जित न हो।
स्वयंसेवी संस्थाओं का भी योगदान:
ग्रीन अर्थ फाउंडेशन, पूर्व महापौर और पूर्व विधान परिषद सदस्य अनिल सोले के नेतृत्व में सोनेगांव तालाब स्थित स्थायी विसर्जन टैंक पर श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देने के लिए स्वयंसेवक तैनात कर रहा है। वहीं, पूर्व महापौर दयाशंकर तिवारी के नेतृत्व वाली लोटस फाउंडेशन ने गांधीसागर तालाब सहित मध्य नागपुर के विभिन्न विसर्जन स्थलों पर जागरूकता अभियान चलाया।
महानगरपालिका अधिकारियों के अनुसार, सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवकों की भागीदारी से पर्यावरणपूरक विसर्जन का संदेश सीधे नागरिकों तक पहुंचा है। इससे त्योहार की परंपरा कायम रखते हुए शहर की तालाबों और जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति भी लोगों का समर्थन बढ़ा है।





