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देश के 65% सोलर कृषि पंप अकेले महाराष्ट्र में

<p><strong>&&num;8211&semi; मार्च 2027 तक 100&percnt; पंपों को दिन में मिलेगी बिजली<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p><strong>नई दिल्ली &colon;-<&sol;strong> देश में सौर ऊर्जा से कृषि पंपों के संचालन के मामले में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है। देश में लगाए गए कुल सोलर कृषि पंपों में से अकेले 65 फीसदी पंप महाराष्ट्र में स्थापित किए गए हैं। आगामी मार्च 2027 के अंत तक राज्य के शत-प्रतिशत कृषि पंपों को सौर ऊर्जा के माध्यम से दिन में बिजली आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। यह जानकारी मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव तथा महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने दी।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>ऊर्जा पर अंतरराष्ट्रीय चर्चासत्र<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>नई दिल्ली में केंद्र सरकार के नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से आयोजित &&num;8216&semi;भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026&&num;8217&semi; में आयोजित अंतरराष्ट्रीय परिचर्चा के दौरान लोकेश चंद्र ने महाराष्ट्र की सौर ऊर्जा पहल और उसकी उपलब्धियों की जानकारी साझा की।<&sol;p>&NewLine;<p>&&num;8216&semi;डिस्ट्रीब्यूटेड एनर्जी फॉर एनर्जी सिक्योरिटी&comma; सेल्फ रिलायंस एंड विकसित भारत 2047&&num;8217&semi; विषय पर आयोजित सत्र में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य ने विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा उत्पादन के जरिए कृषि क्षेत्र की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है। मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2&period;0 के माध्यम से राज्य के 80 प्रतिशत कृषि पंपों को फिलहाल दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इस सत्र में प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने मुख्य संबोधन दिया।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>16 हजार मेगावॉट के सौर ऊर्जा प्रकल्प<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>लोकेश चंद्र के मुताबिक&comma; मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना केंद्र की पीएम-कुसुम योजना के आधार पर संचालित की जा रही है। इसके तहत राज्य में 16 हजार मेगावाट क्षमता के विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा प्रकल्प स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें से अब तक करीब 7 हजार मेगावाट क्षमता के प्रकल्प पूरे हो चुके हैं।<&sol;p>&NewLine;