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दिवाली पर देश में 7 लाख करोड़ रुपये का कारोबार, कैट ने 15-18% वृद्धि की जताई उम्मीद

<p>भारत में दिवाली केवल रोशनी&comma; खुशियों और परंपराओं का पर्व नहीं&comma; बल्कि देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बड़ा आर्थिक महोत्सव बन चुकी है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स &lpar;कैट&rpar; के अनुमान के अनुसार&comma; वर्ष 2026 में नवरात्रि से दिवाली तक देशभर में त्योहारी कारोबार ₹7 लाख करोड़ के पार पहुंच सकता है। यह पिछले वर्ष के ₹6&period;05 लाख करोड़ के रिकॉर्ड कारोबार की तुलना में लगभग 15 से 18 प्रतिशत अधिक होगा।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>70 शहरों में व्यापारिक संगठनों का सर्वे<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार देश के 70 शहरों में व्यापारिक संगठनों के साथ किए गए अध्ययन के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि अकेले दिल्ली में इस वर्ष दिवाली सीजन के दौरान करीब एक लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद है।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>अर्थव्यवस्था को मिलती है गति<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>कैट के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर ने कहा कि दिवाली देश की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था&comma; उद्यमशीलता और व्यापारिक क्षमता का प्रतीक बन गई है। इस दौरान होने वाली खरीदारी से निर्माता&comma; थोक एवं खुदरा व्यापारी&comma; कारीगर&comma; परिवहन&comma; लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र सहित अर्थव्यवस्था के अनेक हिस्सों को गति मिलती है।<&sol;p>&NewLine;<p>कैट के आकलन के अनुसार&comma; त्योहारी कारोबार में किराना एवं एफएमसीजी की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत&comma; सोना-चांदी एवं आभूषण की 10 प्रतिशत&comma; इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स की 8 प्रतिशत तथा कंज्यूमर ड्यूरेबल और रेडीमेड गारमेंट्स की हिस्सेदारी 7-7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गिफ्ट आइटम्स का हिस्सा भी 7 प्रतिशत&comma; होम डेकोर और फर्नीचर का 5-5 प्रतिशत&comma; मिठाई एवं नमकीन का 5 प्रतिशत तथा अन्य वस्तुओं और संबंधित कारोबार का हिस्सा 19 प्रतिशत रहने की संभावना है।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>80 हजार करोड़ का सर्विस सेक्टर<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>त्योहारी सीजन में परिवहन&comma; ई-कॉमर्स डिलीवरी&comma; पैकेजिंग&comma; वेयरहाउसिंग&comma; होटल&comma; रेस्तरां&comma; पर्यटन&comma; कैटरिंग और इवेंट मैनेजमेंट जैसी सेवाओं की मांग भी बढ़ जाती है। कैट के मुताबिक&comma; पिछले वर्ष सेवा क्षेत्र का कारोबार लगभग 65 हजार करोड़ रुपये था&comma; जो इस वर्ष 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि के साथ 80 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।<&sol;p>&NewLine;