– दिवाली से पहले राहत का वादा, अतिवृष्टि से जूझ रहे किसानों को मिलेगी आर्थिक मदद
मुंबई :-राज्य में अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति के कारण “ओला (गीला) घोषित करने की मांग हो रही है, लेकिन सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि “ओला दुष्काळ (गीला सूखा)” जैसी कोई आधिकारिक संकल्पना ही नहीं है और इस मांग को खारिज कर दिया। हालांकि, बेमौसम बारिश और बाढ़ के कारण किसानों पर आए अभूतपूर्व संकट को देखते हुए, सरकार ने यह फैसला लिया है कि सूखे के समय दी जाने वाली सभी सुविधाएं और राहत योजनाएं इन बाढ़ग्रस्त किसानों को भी दी जाएंगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जानकारी दी कि अगले दो-तीन दिनों में नुकसान का आकलन पूरा हो जाएगा और एक व्यापक राहत नीति तैयार कर किसानों को दिवाली से पहले ही आर्थिक मदद दी जाएगी। इस नीति की घोषणा अगले सप्ताह की जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई, और सरकार ने स्पष्ट किया कि वह पूर्रग्रस्तों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। फडणवीस ने बताया कि बैंकों को किसानों की कर्ज वसूली फिलहाल रोकने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को गेंहू, चावल, दाल और ज़रूरी वस्तुओं के किट बांटे जा रहे हैं। राज्य सरकार केंद्र की सहायता की प्रतीक्षा किए बिना अपने संसाधनों से मदद शुरू कर चुकी है। केंद्र सरकार की तय गाइडलाइन्स से परे जाकर भी जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उन्हें भी राहत दी जाएगी।
कर्ज वसूली पर रोक, राहत योजना जल्द
हाल ही में राज्य में भारी बारिश और बाढ़ से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। हजारों हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें पानी में डूब गईं, जिससे किसानों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने कर्ज वसूली पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए हैं। बैंकों को निर्देशित किया गया है कि वे फिलहाल किसी भी किसान से ऋण वसूली की कार्रवाई न करें। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि जल्द ही एक व्यापक राहत योजना लागू की जाएगी। सरकार ने तय किया है कि किसानों को दिवाली से पहले आर्थिक मदद दी जाएगी। फसल नुकसान का पंचनामा तेजी से कराया जा रहा है ताकि सही आंकड़ों के आधार पर मदद दी जा सके। जरूरतमंद परिवारों को राशन किट और आवश्यक वस्तुएं भी वितरित की जा रही हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि वह केंद्र की मदद की प्रतीक्षा किए बिना राहत देना शुरू कर चुकी है। यह निर्णय बाढ़ से जूझ रहे किसानों के लिए संवेदनशील और राहतकारी कदम माना जा रहा है।








