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नागपुर में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन

– संघ से संविधान स्वीकारने, मनुस्मृति जलाने की मांग, कार्यकर्ताओं हिरासत में  

नागपुर :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संविधान स्वीकार करने और मनुस्मृति जलाने की माँग को लेकर युवा कांग्रेस कार्यकर्ता नागपुर के रेशमबाग स्थित संघ के स्मृति भवन में संघ कार्यकर्ताओं को संविधान की एक प्रति देने पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को सक्करदरा चौक पर रोका और हिरासत में ले लिया।

युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में संविधान की एक प्रति लेकर सक्करदरा चौक से विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उन्होंने सक्करदरा चौक स्थित गांधीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और फिर रेशमबाग स्थित स्मृति मंदिर जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाते हुए माँग की कि संघ को अब सौ साल बाद तो संविधान स्वीकार करना चाहिए और मनुस्मृति जलानी चाहिए।

यह घटना महाराष्ट्र के नागपुर शहर में हुई, जहाँ युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय “स्मृति भवन” (रेशमबाग स्थित) की ओर मार्च कर रहे थे। इस प्रदर्शन का उद्देश्य संघ से यह माँग करना था कि वह भारत के संविधान को खुले तौर पर स्वीकार करे और मनुस्मृति का त्याग कर उसका प्रतीकात्मक रूप से दहन (जलाना) करे।

युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संघ के प्रतीक स्थल तक जाकर संघ के कार्यकर्ताओं को भारतीय संविधान की एक प्रति सौंपने की कोशिश की। उनका यह कदम देश में सामाजिक न्याय, समानता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की स्थापना को लेकर प्रतीकात्मक था।

युवा कांग्रेस का कहना है वैचारिक आधार मनुवादी सोच पर आधारित है, जो जातिगत भेदभाव और असमानता को बढ़ावा देता है। इसके विपरीत, भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की गारंटी देता है। इस विरोध के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि आज के समय में मनुस्मृति जैसी ग्रंथियों को त्याग कर संविधान को सर्वोपरि माना जाए। जैसे ही युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता स्मृति भवन की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें सक्करदरा चौक के पास रोक दिया। वहां से उन्हें हिरासत में लिया गया, ताकि कानून-व्यवस्था भंग न हो और कोई टकराव न हो। पुलिस ने बाद में कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया, लेकिन इस प्रदर्शन ने एक बार फिर संघ और विपक्षी दलों के वैचारिक मतभेद को उजागर कर दिया है।

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