पुणे :- धनगर समाज एक योद्धा है, इतिहास में उनका इतिहास शासक के रूप में दर्ज है। समाज को अपने इतिहास को समझना चाहिए और होल्कर द्वारा दी गई शिक्षाओं को अपनाकर योद्धा होने का परिचय देना चाहिए। समाज की सामाजिक और राजनीतिक पहचान स्थापित होनी चाहिए। सत्ता के भूखे राजनेताओं ने सत्ता पाने के लिए धनगर और ओबीसी का इस्तेमाल किया और आपको समाज से बाहर कर दिया। आरक्षण ही प्रगति का मार्ग है और अगर इसे बचाना है, तो धनगरों को सभी ओबीसी समाज को एकजुट करके उनका नेतृत्व करना चाहिए। हम आगामी चुनावों में ओबीसी और आरक्षणवादियों को सत्ता में लाना चाहते हैं। इसके लिए सभी को एकजुट होना होगा,” वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने अपील की।
एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर सकल धनगर समाज के दूसरे राज्यस्तरीय सम्मेलन में बोल रहे थे। पूर्व सांसद डॉ. विकास महात्मे, पूर्व विधायक रामराव वडकुटे, भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता गणेश हाके, कांग्रेस नेता डॉ. यशपाल भिंगे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सचिन गावड़े, महिला एवं बाल विकास आयुक्त नयना गुंडे, आयकर आयुक्त डॉ. नितिन वाघमोड़े, संयोजक एडवोकेट विजय गोफाने, सोमनाथ देवकाटे, संतोष शिंदे, यशपाल रायभोगे, ज्ञानेश्वर नरुते, गणेश सोनटक्के, गणेश दुगाने, धूलदेव तेले, अनुजा जानकर, शंकर ढेबे, महादेव वाघमोड़े, संतोष धवले, शालिनी शिंदे आदि उपस्थित थे। एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि ईमानदार शासक नहीं मिल रहे हैं, समाज केवल नकल पर केंद्रित है, यह गलत है। धनगरों की पहचान शासक समाज के रूप में होनी चाहिए। धनगर और धनखड़ अलग-अलग हैं, ऐसा कहकर हमारे अधिकार छीने गए हैं। 1950 से 1990 तक लगभग 40 वर्षों तक हमें आरक्षण से वंचित रहना पड़ा। जो आरक्षण मिला है, उसमें कुनबी-मराठों को भी शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। यह एक तरह से ओबीसी आरक्षण को समाप्त करने की चाल है। इसलिए, तेलंगाना और तमिलनाडु की तरह ओबीसी समुदाय को 27 प्रतिशत आरक्षण से 60-70 प्रतिशत तक ले जाने के प्रयास आवश्यक हैं।
इस अवसर पर अहिल्या रत्न पुरस्कार वितरित किए गए और आरक्षण के लिए अनशन करने वालों को सम्मानित किया गया। बापूसाहेब शिंदे, रामकाकिसन रोवडेल, जयश्री वक्षे, रूपाली जोशी, डॉ. सोमनाथ सालगर, घनश्याम हाके, भरत कविताके, रामभाऊ लांडे, अक्षता ढेकाले, डॉ. स्नेहा सोनकटे, सुरेखा चौरे-गावड़े, विवेक बिडगर, साइनाली गंगाराम उचले, धुला कोकरे, दत्ता डोंबले, मुकुंद कुचेकर, यशोदा नाइकावड़े, सुनीता अर्जुन, रेखा धनगर-नरोटे का सम्मान किया गया।








