spot_imgspot_img

Latest News

spot_img

Related Posts

मुंबई का 58 करोड़ ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाला

– साइबर विभाग ने खोला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का राज

मुंबई :- मुंबई में 58 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट मामले की जांच कर रहे महाराष्ट्र साइबर विभाग को एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पता चला है, जिसके तार हांगकांग, चीन और इंडोनेशिया तक फैले हुए हैं। इसकी जानकारी एक अधिकारी ने मंगलवार को दी। भारत के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट घोटालों में से एक में साइबर जालसाजों ने इस साल 19 अगस्त से 8 अक्तूबर के बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी बनकर मुंबई के एक व्यवसायी से 58 करोड़ रुपये की ठगी की थी। अधिकारी ने बताया कि पूरा रैकेट क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के जरिए संचालित होता था और चुराई गई धनराशि कई क्रिप्टो वॉलेट के जरिए विदेश भेजी जाती थी। जांचकर्ताओं ने पाया कि यह गिरोह कई कमीशन-आधारित बैंक खातों के जरिए काम करता था।

यह घोटाला तब सामने आया जब मुंबई के एक व्यवसायी ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें सीबीआई अधिकारी होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति का फोन आया था। कॉल करने वाले ने आधिकारिक पूछताछ की आड़ में उन्हें वीडियो कॉल में शामिल होने के लिए धमकाया और कई घंटों में उनके खातों से 58 करोड़ रुपये निकाल लिए। जांच के दौरान साइबर पुलिस को पता चला कि यह कोई अकेला मामला नहीं था, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा था जो एक साल से भी ज्यादा समय से भारतीय नागरिकों को निशाना बना रहा था। महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी नई अधिसूचना में बताया है कि राज्य में कुल 435 राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, जिनमें राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय और गैर-मान्यता प्राप्त दल शामिल हैं। यह सूची स्थानीय निकाय चुनावों से पहले जारी की गई है। आयोग की ओर से यह अपडेटेड सूची महाराष्ट्र सरकार के राजपत्र (गजट) में 8 नवंबर को प्रकाशित की गई। गजट के अनुसार, नई सूची में शामिल 5 राष्ट्रीय राजनीतिक दल,5 राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल, 9 अन्य राज्यों के महाराष्ट्र-स्तरीय दल और 416 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं। इसके अलावा आयोग ने 194 स्वतंत्र चुनाव चिह्नों की सूची भी जारी की है, जिन्हें आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में आवंटित किया जाएगा। महाराष्ट्र के धर्मादाय आयुक्त द्वारा पुणे स्थित एक जैन ट्रस्ट की संपत्ति की बिक्री रद्द करने का आदेश दिए जाने के बावजूद, न तो ट्रस्ट और न ही बिल्डर ने अब तक रजिस्ट्रेशन एंड स्टांप विभाग से बिक्री रद्दीकरण की प्रक्रिया शुरू की है।

Popular Articles