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मोरभवन अंधेरे में—यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे

– 300 बसों का टर्मिनस या खतरे का अड्डा?

– न रोशनी, न सीसीटीवी, न सुविधा—मोरभवन में हर शाम यात्रियों की परीक्षा

नागपुर :- उपराजधानी में आधुनिक ई-बस सार्वजनिक परिवहन की एक नई पहचान बन रही है, लेकिन शहर के सबसे महत्वपूर्ण बस स्टैंडों में से एक मोरभवन, अभी भी अंधेरे में है. शाम के बाद तो यह सचमुच धोखादायक हो जाता है. खंभों पर लगी बत्तियां, योजना का पूर्ण अभाव, धुएं और दुर्गंध का बोलबाला, सीसीटीवी कैमरे नही, ये सब मिलकर यात्रियों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.

सुबह 6 बजे से रात 1० बजे के बीच 3०० से अधिक इंटरसिटी बसें उपलब्ध होनेवाले मोर भवन में सुरक्षा व्यवस्था की यह खामी और भी गंभीर हो गई है. सीसीटीवी न होने से अपराध का डर बना रहता है. हर शाम, मोरभवन बस स्टैंड हमेशा अंधेरे में रहता है. यहां शौचालयों और बेंचों की हालत बहुत खराब है. बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं. यहां रहना बेहद असुरक्षा भरा है. आपको कभी पता नहीं चलता कि बस कब आएगी, कहां से आएगी, कुछ भी पता नहीं. बैठने की जगह नहीं है, न ही रोशनी है, न ही सीसीटीवी. इतना बड़ा बस स्टैंड और सुविधाएं बिल्कुल न के बराबर हैं. एक यात्री ने कहां, यहां कोई सडक़ नहीं है, इसलिए हम महिलाओं के लिए यहां रहना खतरनाक है. पारडी, दिघोरी, सक्करदरा, कामठी, ब्राह्मणी फाटा, नारा, दाभा आदि इलाकों से आने वाले यात्रियों के लिए यह खतरा है.

प्रशासन की नींद कब टूटेगी?

नागपुर नगर निगम परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने भी माना कि मोरभवन इलाके में यात्रियों के लिए बड़ी समस्या है. उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि समस्या के समाधान के प्रयास जारी हैं और संबंधित चाबियां लगाने के लिए एक पत्र जारी किया गया है. हालांकि मोरभवन प्रमुख टर्मिनस है, लेकिन अंधेरे में बस पकडऩा खतरनाक साबित हो रहा है, खासकर महिलाओं के लिए यात्रियों ने मांग की है कि इस समस्या का तुरंत समाधान किया जाए.

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