– हर महीने 50 लाख की एंट्री ! ईडी ने खोली शराब सिंडिकेट की पूरी चेन
नई दिल्ली :- छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में अब तस्वीर साफ होती जा रही है। तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास (आईएएस) की गिरफ्तारी की ताजा कार्रवाई के बाद ईडी उन 2500 करोड़ रुपए के हिसाब को डिकोड कर रही है, जो अपराध से अर्जित आय मानी जा रहे है। यह पैसा बाद में नेताओं, कारोबारियों व अफसरों के नेटवर्क में बंटा। ईडी ने दास को दो दिन के लिए रिमांड पर लिया और पूछताछ में इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यह मामला केवल अवैध शराब बिक्री का नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम कब्जे में लेने का था।
ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि दास ने अपने अधीनस्थ अफसरों और फील्ड स्टाफ को मौखिक रूप से आदेश दिए थे कि सिंडिकेट को बिना खातों में दर्ज किए शराब की बिक्री करने दी जाए। ईडी का आरोप है कि दास को इसके बदले हर माह 50 लाख रु. मिलते रहे और सीधे 18 करोड़ उन तक पहुंचे। हालांकि, एसीबी और ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में इस राशि को 3,000-3,100 करोड़ तक बताया है, लेकिन ईडी की जांच 2500 करोड़ रु. पर केंद्रित है। ईडी का आरोप है कि इस नेटवर्क में हर किसी की भूमिका तय थी।
अवैध शराब नहीं, सत्ता–सिस्टम का गठजोड़
किसी ने नीति और फैसलों पर असर डाला, किसी ने प्रशासनिक संरक्षण दिया, तो किसी ने जमीनी स्तर पर अवैध शराब की बिक्री और पैसा वसूली का काम संभाला। यही तालमेल इस घोटाले की असली ताकत बना। ईडी ने साफ किया है कि आने वाले दो-तीन दिनों में एक चार्जशीट पेश की जा सकती है, जिसमें फाइलों की मंजूरी, पोस्टिंग और पैसे के लेन-देन से जुड़े और खुलासे सामने आएंगे।




