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मराठी स्कूलों में विद्यार्थी नहीं मिलने का मामला

– हाई कोर्ट की सरकार को फटकार

– कहा: स्कूल ही नहीं रहेंगे तो अभिजात मराठी भाषा का दर्जा कैसे बना रहेगा

नागपुर :- राज्य में लगातार बंद हो रहे मराठी माध्यम के स्कूलों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपूर खंडपीठ ने राज्य सरकार से कड़े सवाल किए हैं। सरकार की ओर से यह दलील दिए जाने पर कि मराठी स्कूलों में विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं, न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मौखिक टिप्पणी की कि यदि राज्य में मराठी स्कूल ही नहीं रहेंगे, तो अभिजात मराठी भाषा का दर्जा आखिर कैसे बना रहेगा।

मनपा के मराठी माध्यम के स्कूलों को बचाने के लिए अखिल भारतीय दुर्बल रामाज विकास संस्थान द्वारा कई 2017 से एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय में लंबित है। सोमवार को इस याचिका पर न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि, महानगरपालिका विभिन्न कारणों से मराठी माध्यम की प्राथमिक शालाओं को बंद कर रही है। मराठी माध्यम की शालाओं को लेकर राज्य सरकार और मनपा की भूमिका उदासीन बनी हुई है। इन शालाओं को बचाने के लिए सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। जिस कारण पिछले कुछ वर्षो में इन शालाओं में विद्यार्थियों की संख्या में भारी गिरावट आई है और ये लालाएं अब अंतिम सांसें गिन रही हैं।

याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने दलील है कि मराठी स्कूल बंद होने का मुख्य कारण विद्यार्थियों की कमी है। इस पर न्यायालय ने सवाल उठाया कि मराठी स्कूलों में विद्यार्थियों की कर्म के वास्तविक कारणों की पड़ताल क्यों नहीं की जा रही। अदालत ने सुझाव दिया कि कुछ शैक्षणिक पाठ्‌यक्रमों या नौकरियों में मराठी भाधा को पात्रता के रूप में अनिवार्य किया जा सकता है। जब तक शैक्षणिक व्यवस्था में मराठी भाषा के महत्व को नहीं बढ़ाया जाएगा, तब तक विद्यार्थी मराठी माध्यम की ओर कैसे आकर्षित होंगे।

27 जनवरी को अगली सुनवाई

न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि दस वर्षों के बाद शायद आपको मराठी अनुवादकों की नियुक्ति करनी पड़े, लेकिन तब तक योग्य अनुवादक भी उपलब्ध नहीं होंगे। यदि महाराष्ट्र में ही मराठी स्कूल समाप्त हो जाएंगे. तो अभिजात मराठी भाषा के दर्जे का क्या होगा? राज्य में मराठी शालाओं का अस्तित्व बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। न्यायालय ने राज्य सरकार को यह भी सलाह दी कि मराठी स्कूलों को बचाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार वसव में मराठी भाषा को लेकर गंभीर है, तो उसे इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए निश्चित रूप से ठोस उपाय करने होंगे। सरकार के अनुरोध पर अदालत ने याचिका पर 27 जनवरी को अगली सुनवाई रखी है। चाचिकाकर्ताओं की ओर से एड. आशुतोष धर्माधिकारी ने पैरवी की।

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