– मोबाइल में उलझ रहे बच्चे, वनबाला जैसी गतिविधियां जरूरी
नागपुर :- बच्चों में मोबाइल और टीवी की बढ़ती लत पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नाम्पुर खंडपीठ ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि आज के बच्चे शारीरिक और रचनात्मक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ‘वनबाला ट्रेन’ जैसी मनोरंजक एवं अनुभवात्मक गतिविधियां अत्यंत आवश्यक हैं। बता दें। दें कि सेमिनरी हिल्स स्थित क्षेत्रीय वन विभाग के बालोद्यान में चलने वाली ‘बनबाला ट्रेन’ के बार-बार बंद होने पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया था। पिछली सुनवाई में अदालत ने वनबाला ट्रेन कब तक शुरू करेंगे? इस पर वन विभाग से जवाब मांगा था। मामले पर बुधवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
वन विभाग ने अदालत को बताया कि वनबाला ट्रेन शुरू करने में लगभग 6 महीने का समय लगेगा। इस जवाब पर अदालत ने नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि आज के बच्चे अधिकांश समय मोबाइल और टीवी में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में काबाला ट्रेन जैसी मनोरंजक गतिविधियों का शहर में चालू रहना अत्यंत आवश्यक है, ताकि अभिभावक अपने बच्चों को वहां ले जा सकें। हाई कोर्ट ने वनबाला को शीघ्र शुरू करने पर जोर देते हुए वन विभाग को निर्देश दिया कि इससे संबंधित संपूर्ण जानकारी एक सप्ताह के भीतर अदालत में प्रस्तुत की जाए। व्यायालय मित्र के रूप में एड. अभिभावक निश्चिंत होकर अपने बच्चों को वहां ले जा सकें और बच्चे शारीरिक व रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ सके।
सबसे अच्छी ट्रेन तैयार की जाए
अदालत ने मौखिक रूप से निर्देश दिए कि बच्चों मनोरंजन और सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए उच्च गुणवत्ता की, सुरक्षित और आकर्षक काबाला ट्रेन तैयार की जाए, ताकि के अदालत ने अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट का संज्ञान लिया था। 7 साल बाद दिसंबर 2023 में वनबाला को फिर शुरू किया गया था, लेकिन बार-बार आने वाली तकनीकी खराबियों के कारण इसे दोबारा बंद करना पड़ा। दो वर्ष पूर्व इस परियोजना पर लगभग 1.20 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। 2023 में 1.9 किमी पुराने रेलमार्ग को बदलने की योजना थी, लेकिन अभी तक उसे अमल में नहीं लाया गया है। फिलहाल रेलगाड़ी बंद है। हाई कोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया था।








