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स्कूल बस सुरक्षा पर हाई कोर्ट सख्त

– आरटीओ से मांगा पूरा ब्योरा

नागपुर :- छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर हाई कोर्ट ने स्कूल बसों और वैन के संचालन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. न्या. अनिल किलोर और न्या. राज वाकोडे स्वतः संज्ञान लेकर स्वीकृत जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (आरटीओ) को उन सभी स्कूलों की विस्तृत सूची पेश करने का निर्देश दिया है जो विद्यार्थियों के परिवहन के लिए खुद की बसें या वैन चलाते हैं. अदालत ने इस मामले में मनपा आयुक्त को प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है और छात्रों के लिए निर्धारित किए गए बस स्टॉप के संबंध में विस्तृत और स्पष्ट जानकारी साझा करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही, शिक्षा उपसंचालक को आदेश दिया गया है कि वे स्कूल परिवहन समितियों की अब तक हुई बैठकों का पूरा विवरण एक टेबल के रूप में अदालत में प्रस्तुत करें. अदालत ने आरटीओ को आदेश दिया है कि वह जिले में उन सभी स्कूलों की विस्तृत सूची प्रस्तुत करे, जो विद्यार्थियों के परिवहन के लिए अपनी बसें या वैन संचालित कर रहे हैं। इसके साथ ही इन वाहनों की पंजीयन स्थिति, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, चालक की योग्यता, हेल्पर की उपलब्धता, सीसीटीवी कैमरे, स्पीड गवर्नर और निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन की जानकारी भी मांगी गई है। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। अदालत ने चिंता जताई कि कई स्कूल वाहन नियमों की अनदेखी करते हुए सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

पीठ ने आरटीओ को निर्देश दिया कि वह यह भी बताए कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों या वाहन संचालकों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है और भविष्य में निगरानी के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने संकेत दिए कि यदि लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

मामले की अगली सुनवाई में आरटीओ द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट आगे के निर्देश जारी करेगा। इस खबर के बाद अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि स्कूल परिवहन व्यवस्था और अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनेगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल बसों और वैन पर लगाए जाने वाले सूचना बोर्ड केवल औपचारिकता के लिए नहीं होने चाहिए बल्कि वे ऐसे स्थानों पर लगे हों जहां से वे स्पष्ट रूप से दिखाई दें. इस संबंध में अदालत ने मनपा को हलफनामा दायर करने का भी आदेश दिया. राज्य सरकार की ओर से पेश की गई मानक कार्यपद्धति (एसओपी) के मसौदे को अदालत ने रिकॉर्ड पर ले लिया है.

स्वतंत्र समिति की स्थापना का संकेत

अदालत ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यह जांचने की आवश्यकता पड़ी कि नियमों का पालन सही ढंग से हो रहा है या नहीं तो इसके लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जा सकता है. वर्तमान में प्रतिवादियों को अतिरिक्त सुरक्षात्मक उपाय सुझाने की अनुमति दी गई है जिन्हें अगले सप्ताह तक प्रस्तुत करना होगा.

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