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दीक्षाभूमि का सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर होगा कायाकल्प

– ‘ग्लोबल टेंडर’ के जरिए चुना जाएगा आर्किटेक्ट

नागपुर :- नागपुर में विश्व प्रसिद्ध श्रद्धा स्थल दीक्षाभूमि का विकास अब सिंगापुर और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों की तर्ज पर किया जाएगा। राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री ने इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं और इस भव्य विकास परियोजना के लिए ‘ग्लोबल टेंडर’ प्रक्रिया अपनाए जाने की जानकारी समाज कल्याण उपायुक्त ने हाई कोर्ट को दी। इसके बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने दीक्षाभूमि के विकास के संबंध में प्रशासनिक मंजूरी की जानकारी देने के लिए राज्य सरकार को 3 फरवरी तक का समय दिया। हाई कोर्ट ने इस मामले में बेसमेंट पार्किंग के मुद्दे पर भी राज्य सरकार, एनआईटी और नागपुर महानगर विकास प्राधिकरण से हलफनामे के जरिए अपनी भूमिका स्पष्ट करने के आदेश दिए।

4 में से एक डिजाइन पर लगेगी मुहर

ऐतिहासिक दीक्षाभूमि के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार ने अपनी कार्यवाही तेज कर दी है। ‘डिजाइन एसोसिएट्स आईएनसी’ द्वारा प्रस्तुत 4 वैकल्पिक डिजाइन में से सर्वश्रेष्ठ एक नक्शे का चयन करने के निर्देश दिए गए हैं। 13 दिसंबर, 2025 को सामाजिक न्याय मंत्री की अध्यक्षता में हुई ‘नियोजन भवन’ की बैठक में इन विकल्पों पर चर्चा की गई थी। प्रशासन ने एनआईटी, महानगर पालिका और जिलाधिकारी कार्यालय को आपसी समन्वय के साथ इस विकास योजना को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।

मूल स्तूप की सुरक्षा सर्वोपरि

बैठक के दौरान मंत्रियों और अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दीक्षाभूमि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसलिए यहां पर होने वाले कार्य अत्यंत संवेदनशीलता के साथ किए जाने चाहिए। विकास कार्यों के दौरान दीक्षाभूमि के मूल स्तूप को कोई भी नुकसान पहुंचाए बिना पूरे परिसर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। एनएमआरडीए के आयुक्त ने इस विकास योजना का प्रस्तुतीकरण दिया है। दीक्षाभूमि के विकास के लिए अधिवक्ता शैलेश नारनवरे द्वारा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इस नई योजना से पिछले कई महीनों से रुके हुए दीक्षाभूमि विकास प्रोजेक्ट का रास्ता साफ हो गया है और जल्द ही जमीनी स्तर पर काम शुरू होने की उम्मीद है।

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