spot_imgspot_img

Latest News

spot_img

Related Posts

श्री क्षेत्र चौकी (वन ग्राम), हिंगना : पांडवकालीन बृहस्पति मंदिर, शनि शक्तिपीठ और यंत्रराज श्रीयंत्र का दिव्य संगम – डॉ. प्रवीण डबली

नागपुर जिले के हिंगना तालुका अंतर्गत स्थित श्री क्षेत्र चौकी (वन ग्राम) एक ऐसा पावन तीर्थ है, जहां इतिहास, पुराण, ज्योतिष, यंत्रशास्त्र और आध्यात्मिक साधना एक साथ सजीव होते प्रतीत होते हैं। यहां स्थित महाराष्ट्र का एकमात्र बृहस्पति मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि पौराणिक मान्यताओं के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

पांडवकालीन बृहस्पति मंदिर की पौराणिक कथा

स्थानीय परंपराओं, संत परंपरा और जनश्रुतियों के अनुसार इस क्षेत्र का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि देवगुरु बृहस्पति पांडवों के कुलगुरु थे। जब पांडव अपने अज्ञातवास के काल में विभिन्न स्थानों पर भ्रमण कर रहे थे, तब वे अपने इसी क्षेत्र में गुरु बृहस्पति से मार्गदर्शन प्राप्त करने हेतु मिलें थे।

ऐसी मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां गोपनीय रूप से गुरु बृहस्पति से भेंट की और उनसे धर्म, कर्म तथा भविष्य की दिशा पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। गुरु बृहस्पति ने इस वन क्षेत्र में पांडवों को धैर्य, नीति और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का उपदेश दिया। इसी कारण यह स्थान गुरु-शिष्य परंपरा का साक्षात प्रतीक माना जाता है।

पुराणों में बृहस्पति को ज्ञान, न्याय, धर्म, नीति और गुरु तत्व का अधिष्ठाता ग्रह माना गया है। मान्यता है कि जहां बृहस्पति की साधना होती है, वहां अज्ञान का नाश और विवेक का उदय होता है। इसी विश्वास के चलते इस स्थान पर बृहस्पति देव का मंदिर स्थापित हुआ, जो कालांतर में एक विशिष्ट तीर्थ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।

स्कंदपुराण और चक्रवती नगरी की अवधारणा

इस क्षेत्र को स्कंदपुराण कालीन प्राचीन चक्रवती नगरी के स्वरूप में विकसित किया गया है। संपूर्ण परिसर की रचना ब्रह्मांडीय संरचना और आध्यात्मिक चक्रों के अनुरूप की गई है। यहां ओंकारेश्वर ज्योतिष आखाड़ा द्वारा आध्यात्मिक, ज्योतिषीय और साधनात्मक गतिविधियों का संचालन किया जाता है।

आचार्य भूपेश गाडगे की संकल्पना से यहां शनि शक्तिपीठ का निर्माण किया गया है, जिसने इस क्षेत्र को एक पूर्ण शक्तिक्षेत्र का स्वरूप प्रदान किया। यहां ग्यारह लाख मंत्र जप का विश्व कीर्तिमान (World Record) भी स्थापित है, जो इस स्थान की साधनात्मक ऊर्जा को प्रमाणित करता है।

शनि देव संपूर्ण यंत्र रूप में

इस क्षेत्र की एक अद्वितीय विशेषता यह है कि यहां श्री शनि भगवान मूर्ति रूप में नहीं, बल्कि संपूर्ण यंत्र रूप में विराजमान हैं। मंदिर की संरचना में बाहरी परिक्रमा से लेकर गर्भगृह तक चक्र, अष्टचक्र, षडचक्र, चौकोन, चार गोपुर और अंततः बिंदु की आध्यात्मिक यात्रा कराई जाती है, जो साधक को बाह्य से अंतर की ओर ले जाती है।

विश्व का सबसे बड़ा श्रीयंत्र : यंत्रराज की स्थापना

यहां स्थापित 3300 किलो वजनी, चार फुट ऊंचा और चार फुट चौड़ा पत्थर से निर्मित श्रीयंत्र भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा श्रीयंत्र माना जाता है।

ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, श्रीयंत्र के गर्भ में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। श्रीयंत्र को श्री ललिता महात्रिपुरासुंदरी देवी का निवासस्थान कहा गया है, जहां महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, परब्रह्म, परविष्णु और भगवान शिव का भी निवास माना जाता है।

श्रीयंत्र के नौ चक्र मानव शरीर के नौ आध्यात्मिक चक्रों के समान माने जाते हैं। इसकी संरचना में मध्य का बिंदु, भूपूर एवं चार द्वार, षोडश कमल, अष्ट कमल और 43 त्रिकोण सम्मिलित हैं। इसी कारण श्रीयंत्र को विश्व के सभी यंत्रों में सबसे जटिल, शीघ्र फलदायी और प्रभावशाली माना जाता है तथा इसे यंत्रराज कहा जाता है।

अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल

इस दिव्य क्षेत्र में श्रद्धालुओं को श्री शनि देव दर्शन, गर्भगृह में छाया एवं ऋणमुक्तेश्वरी दर्शन, परिक्रमा पथ व नवग्रह कुंड, भारत का सर्वप्रथम तिथि व नक्षत्र यंत्र, मध्य भारत की सटीक समय बताने वाली सूर्यघड़ी तथा सवा पंद्रह फीट ऊंची भगवान विठ्ठल की भव्य मूर्ति के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है।

श्रीयंत्र मंत्र

।। ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।।

श्री क्षेत्र चौकी (वन ग्राम) केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पांडवकालीन स्मृतियों, गुरु बृहस्पति की कृपा, शनि साधना और यंत्रशास्त्र की पराकाष्ठा का जीवंत केंद्र है। यह स्थान साधक को केवल दर्शन नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव और अंतर्मुखी यात्रा का अवसर प्रदान करता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र श्रद्धा, साधना और सिद्धि—तीनों का संगम बन गया है।

Popular Articles