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वन्यजीवों की बिक्री पर अब भी नहीं दिख रही गंभीरता

– केवल लकड़गंज पर फोकस

नागपुर :- लकड़गंज के रविवार बाजार में जंगली पक्षियों और अन्य वन्यजीवों की अवैध बिक्री का खुलासा होने के बाद हंगामा मच गया. यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया है. विगत दिनों हुई सुनवाई में मनपा ने उच्च न्यायालय में आश्वासन दिया कि 1 फरवरी को पुलिस सुरक्षा के साथ कार्रवाई की जाएगी. सूत्रों ने बताया कि रविवार को दस्ता कार्रवाई करने के लिए पहुंचा लेकिन उस दिन वन्यजीवों की अवैध बिक्री का बाजार लगा ही नहीं. हालांकि सुनवाई के बाद कोर्ट ने मनपा के जवाब को रिकॉर्ड में लेते हुए कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था. कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन केवल लकड़गंज क्षेत्र में वन्यजीवों की अवैध बिक्री की रोकथाम पर फोकस कर रहा है. अन्य क्षेत्रों में वन्यजीवों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. इस ओर नागपुर महानगरपालिका और वन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है. बता दें कि वन्यजीवों की बिक्री के संबंध में कोर्ट ने उप वन संरक्षक, मुख्य वन्यजीव रक्षक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पुलिस आयुक्त, मनपा आयुक्त और महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव बोर्ड को नोटिस जारी किया था.

अन्य इलाकों में भी फील्डिंग लगाए प्रशासन

बताते चलें कि वन्यजीवों की अवैध बिक्री लकड़गंज समेत मेकोसाबाग, मोमिनपुरा, यशोधरानगर क्षेत्र, मोतीबाग कॉलोनी समेत अन्य इलाकों में भी हो रही है. कोर्ट की सख्ती के बाद लकड़गंज के रविवार बाजार में वन्यजीवों की बिक्री पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया. अन्य इलाकों में वन्यजीवों की बिक्री पर प्रशासन का ध्यान नहीं है. वन्यजीवों की बिक्री के रैकेट पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को विविध इलाकों में फील्डिंग लगाने की आवश्यकता है.

नियमित छापेमारी अनिवार्य

वन्यजीव विक्रेताओं की धरपकड़ तेज करने की आवश्यकता है. वन विभाग को नियमित रूप से छापामार कार्रवाई करना अनिवार्य है. पकड़े गए वन्यजीव विक्रेताओं के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाए. वन विभाग समेत संबंधित विभाग को भी इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है. अवैध पक्षी विक्रेताओं के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि ये खुलेआम कहते हैं ‘करण तोता 4,000 रुपये में ले लो.’ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत ‘एलेक्सजेन्डरीन पैराकीट’, ‘प्लम हेडेड पैराकीट’ और ‘ रोज रिंगड पराकीत’ की बिक्री अवैध है. इसके बावजूद ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों की डिक्की में छिपाकर इन पक्षियों की बिक्री की जा रही है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल है.

शिकायत के बावजूद सख्ती नहीं

प्राणी मित्रों और वन्यजीव संरक्षण संस्थानों का कहना है कि कई बार जंगली जानवरों की बिक्री उजागर की गई. इस संबंध में वन विभाग को भी सूचित किया लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं की गई. शिकायत के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण वन्यजीव विक्रेताओं के हौसले बुलंद होते जा रहे है।


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