“फ्लाईओवर बना मगर सुविधा नहीं! – इंदौरा चौक पर उतराव की उठी मांग”
“₹573 करोड़ के डबल-डेकर फ्लाईओवर पर नागरिकों की नाराज़गी”
नागपुर २१ : देश का पहला चार-स्तरीय और एशिया का सबसे लंबा डबल-डेकर फ्लाईओवर नागपुर को मिला तो सही, लेकिन इसके उपयोग को लेकर अब नागरिकों में असंतोष तेजी से उभर रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता व वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रवीण डबली ने इसकी आधी अधूरी कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए फ्लाईओवर में इंदौरा चौक, दस नंबर पुलिया और कड़बी चौक पर मध्य उतराव की सुविधा विकसित करने की मांग रखी है।
डॉ. डबली का कहना है कि यह फ्लाईओवर केवल सीधे शहर से बाहर जाने वालों को ध्यान में रखकर बनाया गया, जिससे इंदौरा, गड्डीगोदाम, नारी रोड, वैशालीनगर, कड़बी चौक जैसे क्षेत्रों के हजारों नागरिक इससे वंचित रह गए हैं। उनका स्पष्ट तर्क है – “अगर शहर के नागरिक ही इसका उपयोग न कर सकें, तो यह सुविधा किसके लिए है?”
सीधे चढ़ गए तो सीधे बाहर, बीच में उतरने की कोई सुविधा नहीं!
करीब ₹573 करोड़ की लागत से बना यह 5.6 किमी लंबा फ्लाईओवर एलआईसी चौक से ऑटोमोटिव चौक तक जाता है। इसके ऊपर मेट्रो और नीचे वाहनों के लिए मार्ग बनाए गए हैं, लेकिन इस पूरी संरचना में एक भी मध्य रैंप या स्लिप लेन की व्यवस्था नहीं की गई है।
“यदि कोई गलती से फ्लाईओवर पर चढ़ जाए, तो उसे 15–20 मिनट का चक्कर लगाकर ऑटोमोटिव चौक से शहर में वापस आना पड़ता है, जिससे न सिर्फ समय की बल्कि ईंधन की भी भारी बर्बादी हो रही है,” डॉ. डबली ने बताया।
नीचे की सड़क दे रही दुर्घटनाओं को निमंत्रण, गड्ढों की भरमार
फ्लाईओवर की ऊपरी परत भले ही चमचमाती हो, लेकिन नीचे की सड़कें बेहद जर्जर और खस्ताहाल हैं। मेट्रो पिलरों के पास की सड़कें धंस चुकी हैं, जिससे वाहन चालकों को ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। कमर दर्द, गर्दन में खिंचाव और ट्रैफिक जाम9422125656 रोज़मर्रा की समस्याएं बन चुकी हैं।
यह स्पष्ट नहीं है कि नीचे की सड़कों का रख-रखाव किस विभाग की जिम्मेदारी है – मेट्रो, एनएचएआई, मनपा, रेलवे या स्मार्ट सिटी प्रशासन? लेकिन ज़िम्मेदारी तय न होने से जनता को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
तकनीकी सर्वे और सार्वजनिक सुझाव की मांग
डॉ. डबली ने इस विषय को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मनपा प्रशासन, मेट्रो और एनएचएआई को इस अखबार के माध्यम से मांग की है कि इस फ्लाईओवर का एक संयुक्त तकनीकी सर्वेक्षण किया जाए। इसमें सार्वजनिक सुझावों को भी शामिल किया जाए ताकि इस बहुप्रशंसित प्रोजेक्ट को वास्तव में आम नागरिकों के लिए उपयोगी बनाया जा सके। कितनी गाड़िया यहां से गुजरती है। यह भी जांच का विषय है।
सिर्फ शो-पीस नहीं, शहर की ज़रूरत भी हो फ्लाईओवर
यह फ्लाईओवर देश का पहला प्रोजेक्ट है जिसमें चार स्तरों पर ट्रैफिक व्यवस्था की गई है – नीचे रेलवे ट्रैक, फिर सड़क, ऊपर फ्लाईओवर और सबसे ऊपर मेट्रो। लेकिन अगर इसका उपयोग सिर्फ सीमित वर्ग कर पा रहा है, तो यह नागपुर के लिए अधूरा सपना बनकर रह जाएगा।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन जनहित की इस आवाज़ को सुनेगा? क्या नागपुर के नागरिक जल्द ही इंदौरा, गड्डीगोदाम और कड़बी चौक जैसे इलाकों में फ्लाईओवर से उतरने की सुविधा पा सकेंगे?




