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12 वीं पेपर लीक कांड : नागपुर में एसआईटी जांच से खुल सकते हैं बड़े राज

– कोचिंग संस्थाओं का बढ़ता दखल : क्या शिक्षा व्यवस्था बन गई है समानांतर सिस्टम?

– 1 से 3 परीक्षाओं तक निलंबन की तैयारी: क्या दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई?

नागपुर :- नागपुर में 12वीं की परीक्षा में 2 विषयों के पेपर लीक प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है. जांच में और खुलासे होने की संभावना है, लेकिन नकल का यह कारोबार वर्षों से फलफूल रहा है. इसमें पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थाओं की एंट्री ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस पूरे प्रकरण में कोचिंग संस्था की बोर्ड अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक से साठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता.

वर्तमान में कोचिंग संस्थाओं की बाढ़ सी आ गई है. फिलहाल साइंस और कॉमर्स की 11वीं व 12वीं की क्लासेस जूनियर कॉलेजों में नहीं बल्कि कोचिंग-ट्यूशन में ही लगती हैं. यह एक तरह की समानांतर व्यवस्था बन गई है. अपनी साख बनाने के लिए कई कोचिंग संस्थाएं प्रवेश के वक्त ही 12वीं में उत्तीर्ण कराने की भी ‘गारंटी’ देती हैं. कोचिंग संस्थाओं की बाढ़ का ही नतीजा है कि कई जूनियर कॉलेजों ने इनके साथ ‘टायअप’ कर लिया है. इस टायअप के तहत छात्र भले ही जूनियर कॉलेज में प्रवेश लें लेकिन क्लासेस कोचिंग में ही करते हैं.

पिछले वर्षों में यह मुद्दा गंभीर हो गया है लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. यह हकीकत शिक्षा विभाग से लेकर शिक्षा मंत्री तक तो मालूम है लेकिन सभी की ‘जेब गरम’ होने से कार्रवाई तो दूर इस ओर कोई झांक कर भी नहीं देख रहा है.

गोपनीय जानकारी कैसे हो रही लीक

परीक्षा में नकल सभी स्तर पर होती है. भले ही बोर्ड ने शिक्षकों सहित केंद्र संचालकों की अदला-बदली की है लेकिन सेटिंग हर स्तर पर जारी है. कस्टोडियन से केंद्र तक पेपर का लिफाफा लेकर जाने के लिए बोर्ड द्वारा रनर नियुक्त किये गये हैं. इनकी जिम्मेदारी पेपर लेकर जाने और उत्तर पत्रिकाएं कस्टोडियन तक जमा करने की होती है. हर केंद्र के लिए बोर्ड ने रनर नियुक्त किये हैं. इनकी कोचिंग संस्थाओं के साथ साठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता. रनर केबारे में बोर्ड में जानकारी होती है.

सूत्र बताते हैं कि कोचिंग संस्थाएं बोर्ड अधिकारियों के साथ मिलकर जानकारी हासिल करती हैं. जब कोचिंग संस्थाएं छात्रों को उत्तीर्ण करने की जिम्मेदारी ले रही हैं तो फिर उनका काम होता है कि किसी भी तरह से सिस्टम के भीतर अपनी पैठ जमाना.

गोपनीय जानकारी कैसे हो रही लीक?

इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग और शालेय शिक्षा मंत्री केवल कार्रवाई करने के अलावा कोई ठोस जवाब नहीं दे रहे हैं. हालांकि बोर्ड ने सेंट उर्सूला स्कूल में परीक्षा के लिए तैनात समूचे स्टॉफ की बदली कर दी है. वहीं परीक्षा के बाद वाट्सएप पर पेपर देखने वाले छात्रों के बयान दर्ज किए जाएंगे. बोर्ड के सूत्रों की मानें तो छात्रों को 1 से लेकर 3 परीक्षाओं तक के लिए निलंबित किया जा सकता है. अब कितने छात्रों पर कार्रवाई होती है यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन इसमें भी ‘झोल’ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. बोर्ड अध्यक्ष इस बारे में कोई भी जानकारी देने से बच रहे हैं.


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